देश की आजादी के लिए बलिदान हुए शहीदों की निशानियों और उनके दस्तावेज का महत्व सिर्फ ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि ये दस्तावेज सांस्कृतिक, भावनात्मक और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े हुए हैं. यूपी के प्रयागराज की एक इमारत में 4 हजार से अधिक अमर शहीदों से जुड़े दस्तावेज और प्रतीक संरक्षित हैं, जो 1857 के विद्रोह में फांसी में चढ़ा दिए गए या जेल में बंद कर तिल तिल मरने के लिए विवश कर दिए गए.
इसमें कई तो ऐसे भी हैं, जिनका नाम भी नई पीढ़ी शायद ही जानती हो. आज देश के अलग अलग हिस्सों के 1820 रिसर्च स्कॉलर शहीदों के इन दुर्लभ दस्तावेजों पर शोध कर रहे हैं. देश में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम यानी 1857 के गदर में इलाहाबाद (आज के प्रयागराज) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक थी. यह शहर उस समय ब्रिटिश प्रशासन, सेना और परिवहन नेटवर्क के लिए एक अहम केंद्र था.
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