उत्तर प्रदेश के एक कोच को एथलीट धाविका के साथ दरिंदगी की कोशिश करने के मामले में बरेली कोर्ट ने 7 साल कैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है. दरअसल कोच साहिबे आलम ने मानसून मैराथन के नाम पर षड्यंत्र रचा था और 14 साल की धाविका को नैनीताल ले गया था. उसने नैनीताल में एक होटल के कमरे में एथलीट धाविका का शोषण किया था.
साहिबे आलम ने एथलीट धाविका को जबरन गंदी फिल्म दिखाकर उसके साथ दरिंदगी की कोशिश की थी. इसके बाद पीड़िता ने नैनीताल से लौटकर अपने परिवार वालों को आपबीती सुनाई थी लेकिन कोच से डर कर दहशत में काफी समय तक पीड़िता ने शिकायत नहीं की. हालांकि साल 2018 में दहशत से उबरने के बाद पीड़िता ने मुकदमा दर्ज कराया था. इतना ही कोच समझौते के लिए तरह-तरह से दबाव बना रहा था.
दुष्कर्म की कोशिश की
कोच साहिबे आलम बरेली एथलेटिक संघ का सचिव भी रह चुका है. एथलेटिक कोच रहते हुए वह लगातार विवादों में रहा. लंबी सुनवाई के बाद बरेली कोर्ट ने पीड़िता को इंसाफ दिया और आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई. फैसला आने के बाद कोच को जेल भेज दिया गया है. साल 2017 में कोतवाली क्षेत्र के बिहारीपुर मैमरान के रहने वाले कोच साहिबे आलम ने धाविका को एथलीट बनाने का लालच दिया. नैनीताल ले जाकर एक कमरा बुक किया. उसे कमरे में ले जाकर जबरन गंदी फिल्म दिखाई और उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की.
जान से मारने की धमकी दी
जब धाविका ने इस बात का विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी. डरी सहमी धाविका जब बरेली वापस लौटी तो उसने अपने परिवार वालों को पूरी आपबीती सुनाई. ये मामला साल 2017 का था, लेकिन पीड़िता ने डर के मारे एक साल बाद हिम्मत करके साल 2018 में कोच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. जब मामला कोर्ट पहुंचा तो आरोपी की ओर से 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए. दोनों पक्षों को सुनने और सबूतों को देखने के बाद स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने दोषी साहिबे आलम को 7 साल की सजा सुनाई. इसके साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया.
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