दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी पत्नी के साथ “अप्राकृतिक” यौन संबंध बनाने के एक मामले में एक पति को लेकर फैसला सुनाया. इस मामले में कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्देश देने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि आईपीसी की धारा 377 वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) को मान्यता नहीं देती है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे कृत्यों को दंडित करने वाली धारा 377 वैवाहिक रिश्ते में लागू नहीं होगी, खासकर जब सहमति का आरोप गायब हो.
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुनवाई कर रही थीं. इस केस में पति पर कथित तौर पर अपनी पत्नी के साथ ओरल सेक्स करने के लिए उसके खिलाफ धारा 377 (अप्राकृतिक अपराधों के लिए सजा) का आरोप तय करने का निर्देश निचली अदालत ने दिया था. 13 मई को फैसले में कहा गया कि कानून वैवाहिक बलात्कार की अवधारणा को मान्यता नहीं देता है.
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