डेढ़ महीने में सांवलिया सेठ की कमाई 29 करोड़, दान में मिली 135 किलो चांदी

राजस्थान

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित सांवलिया सेठ धाम में हर साल लाखों भक्त आते हैं. यहां वह भगवान के दर्शन करते और वह अपनी क्षमता अनुसार मंदिर में दान भी करते हैं. सांवलिया सेठ धाम में आने वाले दान की साल में 11 बार गिनती होती है. इस बार इस गिनती की शुरुआत पिछले बुधवार को हुई थी, जिसमें करोड़ों रुपये के दान आने की बात सामने आई है. साथ ही भक्तों ने मंदिर में दिल खोलकर सोना-चांदी चढ़ाया है.

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सांवलिया सेठ धाम में चतुर्दशी यानि होली पर खोले गए भंडार में प्राप्त कुल राशि की काउंटिंग पूरी हो गई है. पिछले डेढ़ महीने के भंडार, भेंट कक्ष और ऑनलाइन प्राप्त राशि मिलाकर मंदिर को कुल 29 करोड़ 9 लाख 62 हजार 700 रुपए का दान भक्तों से प्राप्त हुआ हैं, जो पिछले साल के इन्हीं डेढ़ महीने के भंडार की तुलना में 56.28% ज्यादा है. इन पैसों के अलावा वर्तमान बाजार कीमत के हिसाब से करीब 2 करोड़ रुपए का सोना-चांदी भी दान स्वरूप मंदिर को भेंट किया गया है.

ऑनलाइन आया करोड़ों का दान

मंदिर की परंपरा के अनुसार इस बार डेढ़ महीने का भंडार बीते बुधवार को खोला गया था. मंदिर को भेंट कक्ष और ऑनलाइन माध्यम से भी बड़ी धनराशि प्राप्त हुई. 4 करोड़ 64 लाख 68 हजार 592 रुपए ऑनलाइन और मनीऑर्डर के जरिए भक्तों ने मंदिर को चढ़ाए हैं. मंदिर को भारी मात्रा में सोना और चांदी भी मिला है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में है. मंदिर को कुल 1.13 किलो सोना और करीब 135 किलो चांदी मिली है.

पुजारी को तनख्वाह देने की है खास परंपरा

यहां किसी पुजारी को महीने की तय तनख्वाह नहीं दी जाती है. परंपरा के अनुसार ही पुजारी को तनख्वाह मिलती है. जैसे ही चढ़ावे की गिनती के लिए भंडार खोले जाते हैं तो सबसे पहले मुख्य पुजारी दोनों हाथ भरकर राशि बाहर निकलता है. उसके हाथ में जितनी ज्यादा राशि आएगी वही उसकी तनख्वाह होती है. मंदिर के गर्भगृह के सामने लगे भंडार में से जैसे ही नोट एक बार पुजारी के हाथ में आ जाए तो वह उसको भगवान के पास रखकर अपने पास रख लेते हैं. भंडार की बाकी सभी राशि और सोने चांदी को लॉकर में जमा करवा दिया जाता है. यहां साल में करीब 11 बार भंडार खुलता है.

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