महाराष्ट्र के जलगांव में बुधवार को रेल हादसा हुआ था. मुंबई जा रही पुष्पक एक्सप्रेस में चेन पुल्लिंग के बाद कुछ यात्री ट्रेन से नीचे उतरे थे. इस दौरान वो विपरीत दिशा से आ रही कर्नाटक एक्सप्रेस की चपेट में आ गए. इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई. 15 घायल हो गए. जान गंवाने वालों में चार नागरिक नेपाल के थे, जिनके परिवारों ने हादसे के बाद का भयावह मंजर बयां किया है.
लच्छीराम खटारू पासी नेपाल के उन 4 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने इस हादसे में जान गंवाई. उनके साथियों ने बताया कि खुद की जान बचाने के लिए कैसे वो दो ट्रेनों के बीच दुबके रहे. लच्छीराम के भतीजे रामरंग पासी ने बताया कि चाचा नेपाल के बांके जिले के रहने वाले थे. ट्रेन की चपेट में आने से उनके हाथ और पैर के कुछ हिस्से कट गए.
चाचा को चेहरे और कपड़ों से पहचाना
उसने बताया कि चाचा 5 अन्य लोगों के साथ यात्रा कर रहे थे. चाचा को चेहरे और कपड़ों से पहचाना. क्षत-विक्षत शव देखकर वो सिहर उठा. लच्छीराम के साथ यात्रा कर रहे शौकत अली ने कहा, ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैली थी. हमने बोगी के अंदर धुआं देखा. ट्रेन स्लो हुई तो हम नीचे उतरे.
इससे पहले कुछ समझ पाते…
उन्होंने कहा, जैसे ही नीचे उतरे, कुछ ही मिनट में दूसरी ट्रेन वहां आ पहुंची. इससे पहले कुछ समझ पाते लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. मुझे दोनों ट्रेनों के बीच थोड़ी सी जगह मिली और हम एक-दूसरे को पकड़कर वहां लेट गए, इसलिए बच गए.
अधिकारियों ने क्या कहा?
मध्य रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, ये हादसा जलगांव के पाचोरा शहर के पास माहेजी और परांडे स्टेशन के बीच हुआ. किसी ने ट्रेन की चेन खींच दी. इसके बाद लखनऊ-मुंबई पुष्पक एक्सप्रेस रुक गई. कुछ यात्री जल्दबाजी में बगल की पटरियों पर कूद गए और बेंगलुरु से दिल्ली जा रही कर्नाटक एक्सप्रेस की चपेट में आ गए. हादसे में मारे गए नेपाली नागरिकों की पहचान कमला नवीन भंडारी, जवाकला भाटे, लच्छीराम खटारू पासी और इम्तियाज अली के रूप में हुई है.
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