ट्रंप की चालाकी को समझ गया हमास! दो दिन की वार्ता के बाद भी शांति प्लान पर नहीं लगी रही मुहर

विदेश

ट्रंप के गाजा युद्ध खत्म करने के लिए दिए गए प्रस्ताव पर हमास और इजराइल के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता मिस्र के शर्म अल-शेख में जारी है. हमास ने भले ही प्रस्ताव की सभी बंधकों को रिहा करने वाली शर्त को मान लिया है, लेकिन वह कई दूसरे बिंदुओं पर सहमत नहीं है. हमास ने दूसरे दिन की वार्ता पूरी होने पर इजराइल से गाजा युद्ध खत्म करने की ‘गारंटी’ मांगी है.

युद्ध शुरू होने की दूसरी वर्षगांठ पर व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि गाजा समझौते की वास्तविक संभावना है, क्योंकि मंगलवार को मिस्र के रिसॉर्ट शहर शर्म अल-शेख में वार्ता समाप्त हो गई. भले ही ट्रंप कह रहे हों की समझौता हो जाएगा, लेकिन वह इस बात की गारंटी नहीं दे रहे हैं कि समझौता टिका कब तक रहेगा और इजराइल गाजा से बाहर कब तक निकल जाएगा. शांति मसौदे में ट्रंप ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है, जो पूरी तरह इजराइल के पक्ष में है. जिसपर हमास को भरोसा नहीं हो पा रहा है.

हमास को नहीं हो रहा भरोसा

भले ही ट्रंप के इस प्लान का कई मुस्लिम देश स्वागत कर चुके हों, लेकिन हमास को उसके सहयोगी इजराइल पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. हमास के सीनियर अधिकारी फॉजी बरहौम ने कहा कि समूह के वार्ताकार युद्ध के खात्में और गाजा से इजराइली सेना की पूरी तरह वापसी चाहते हैं. लेकिन ट्रंप की योजना इजराइली सैनिकों की वापसी के बारे में अस्पष्ट है, और चरणबद्ध वापसी के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई है. यह वापसी तभी होगी जब हमास अपने 48 बंधकों को वापस कर देगा, जिनमें से 20 के जीवित होने की संभावना है.

मिस्र की सरकार से जुड़े अल कहेरा न्यूज के मुताबिक हमास के शीर्ष वार्ताकार, खलील अल-हय्या ने कहा कि समूह को इजराइल पर एक पल के लिए भी भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि हमास असल गारंटी चाहता है कि युद्ध खत्म हो जाएगा और फिर से शुरू नहीं होगा, उन्होंने इजराइल पर गाजा युद्ध में दो बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.

इजराइल ने पहले किया संघर्ष विराम का उल्लंघन

पिछले दो सालों से जारी युद्ध में दो बार संघर्ष विराम हो चुका है, दोनों बार इजराइल ने समझौते का उल्लंघन किया है. जिसके बाद हमास अमेरिका से गारंटी चाहता है कि इजराइल फिर से युद्ध शुरू नहीं करेगा. साथ ही इजराइल की पूरी तरह गाजा से वापसी मसौदे में सुनिश्चित हो. इन भी मुद्दों को लेकर मिस्र में वार्ता हुई है.

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