महाराष्ट्र सरकार ने देवी अहिल्यादेवी होल्कर के जीवन पर एक फिल्म बनाने का ऐलान किया है. शनिवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने यह घोषणआ की. देवी अहिल्यादेवी होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को अहिल्यानगर जिले के चौंडी में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उपस्थित थे. इस कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि राज्य सरकार अहिल्यादेवी होल्कर के जीवन पर एक फिल्म बनाएगी.
फडणवीस ने कहा है कि जिस तरह छत्रपति संभाजी महाराज का इतिहास फिल्म छावा के माध्यम से दिखाया गया, उसी तरह राज्य सरकार अहिल्यादेवी होल्कर के जीवन पर फिल्म बनाएगी. बता दें कि छावा फिल्म काफी सुर्खियां बंटोरी थी और मराठा इतिहास के गौरव को उस फिल्म में फिल्माया गया था.
अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्यानगर किया गया
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्यानगर कर दिया. राम शिंदे और मैंने आज के कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया था. इसी वजह से जब मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला तो उन्होंने मुझसे कहा कि एक तरफ अहिल्यादेवी की जन्मभूमि है तो दूसरी तरफ कर्मभूमि है.
उन्होंने कहा कि पीएम ने कहा किइस बार मैं देवी अहिल्यादेवी होल्कर की राजधानी में उनके कार्य स्थल पर सभा करूंगा. हालांकि, फडणवीस ने कहा कि वह अगली बार देवी अहिल्यादेवी होल्कर की जन्मस्थली जरूर आएंगे.
इस बीच, उन्होंने आगे कहा कि देवी अहिल्याबाइ ने 28 वर्षों तक शासन किया. छत्रपति शिवाजी के बाद कल्याणकारी राज्य चलाने वाली अहिल्यादेवी होल्कर का नाम स्मरण आता है.
सीएम फडणवीस ने अहिल्याबाई को लेकर कही ये बात
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारत निर्मित ब्रह्मोस ने पाकिस्तान के ठिकानों को नष्ट कर दिया था, उसी प्रकार अहिल्या देवी ने शक्तिशाली तोपखाना बनवाया था, इसलिए कोई भी उनके राज्य पर हमला करने का हिम्मत नहीं कर सका.
उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था, उस समय किसी भी राजा ने उस मंदिर को बनाने की हिम्मत नहीं की, लेकिन देवी अहिल्याबाई होल्कर ने उसी मंदिर के बगल में एक और मंदिर बनाया, उन्होंने ध्वस्त मंदिर के अवशेषों को वैसे ही रखा, क्योंकि ध्वस्त मंदिर को देखने के बाद हिंदू जागृत हो जाएंगे.
सीएम फडणवीस ने यह भी कहा कि अहिल्यादेवी ने दहेज प्रथा को भी रोका था और उनके समय में किसी ने दहेज लेने या मांगने की हिम्मत नहीं की.
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