‘छात्रा की अटेंडेंस कम थी…’ यूनिवर्सिटी के दावे पर क्या बोला भाई? बताई बहन की डिप्रेशन की वजह

दिल्ली

ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी की सेकंड इयर की छात्रा ज्योति झांगरा के सुसाइड केस में आरोपी दो प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया गया है. छात्रा के परिजन ने दो प्रोफेसरों पर बेटी को मेंटल टॉर्चर करने का आरोप लगाया है. उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को पूरे मामले की जानकारी थी, लेकन वे चुप्पी साधे रहे. अब पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि छात्रा की यूनिवर्सिटी में अटेंडेंस कम थी.

18 जुलाई को छात्रा ज्योति ने सुसाइड कर लिया था. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, डेंटल मैटेरियल कोर्स में ज्योति ने कुल 65 थ्योरी कक्षाओं में से मात्र 5 में और 62 प्रैक्टिकल में से 15 में हिस्सा लिया. वहीं प्रीक्लिनिकल प्रोस्थोडॉन्टिक्स (पीसीपी) विषय में उसकी उपस्थिति थ्योरी में 17/53 और प्रैक्टिकल में 31/83 रही. माइक्रोबायोलॉजी में भी उसकी उपस्थिति काफी कम दर्ज की गई.

दो प्रोफेसरों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप

छात्रा के कथित सुसाइड नोट में दो प्रोफेसरों पर मानसिक उत्पीड़न का जिक्र था. नोट में उसने लिखा कि वह उन्हें जेल में देखना चाहती है. छात्रा के परिजनों और दोस्तों के मुताबिक, यही वे प्रोफेसर थे, जिन्होंने उसकी प्रोजेक्ट फाइलों में हस्ताक्षर की वैधता पर सवाल उठाए थे और उसे जालसाजी का आरोप लगाकर प्रताड़ित किया था.

‘प्रोजेक्ट में सिग्नेचर संदेहास्पद था’

यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता का कहना है कि प्रोफेसरों का मकसद छात्रा की मदद करना और बेहतर करने के लिए मोटिवेट करना था. हमलोग हमेशा एक-एक छात्रों से बात करते रहते हैं, ये जानने के लिए कोई दिक्कत तो नहीं है. इसका मकसद छात्रों पर दबाव डालना नहीं होता है. कई छात्रों ने अपना प्रोजेक्ट सबमीट किया था. इनमें से ज्योति के सबमीट प्रोजेक्ट में सिग्नेचर संदेहास्पद था, इसी को लेकर प्रोफेसर ने उससे सवाल किया था.

क्या बोला ज्योति का भाई?

वहीं, ज्योति के भाई अक्षय ने बताया है कि उसकी बहन को गेहूं से एलर्जी थी. उसे त्वचा संबंधी बीमारी थी. इसके चलते वह हर वीकेंड गुड़गांव स्थित अपने घर लौट जाती थी और सोमवार को वापस आती थी. इसी वजह से उसकी अटेंडेंस प्रभावित हुई होगी. परिवार का आरोप है कि ज्योति के हेल्थ कंडीशन की जानकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन को थी, लेकिन उन्होंने उसकी कोई मदद नहीं की, जिसका नतीजा वह डिप्रेशन में चली गई. फिलहाल, दोनों प्रोफेसरों को निलंबित कर दिया गया है और मामले की जांच यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी (ICC) द्वारा की जा रही है. छात्रा ने सुसाइड नोट में दो प्रोफेसर्स, महिंदर सिंह चौहान और शैरी वशिष्ठ पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया

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