मौनी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. माघ महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. मौनी अमावस्या के दिन स्नान-दान करना बहुत ही शुभ माना गया है. इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है. मौनी अमावस्या पर पूजन और व्रत भी किया जाता है. मौनी अमावस्या पर भगवान सूर्य का पूजन किया जाता है. उन्हें अर्घ्य दिया जाता है.
मौनी अमावस्या पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता. मौनी अमावस्या पर चंद्रमा का पूजन भी नहीं किया जाता. इस दिन चंद्रमा के न निकलने से मन की स्थिति बिगड़ सकती है. इसलिए ज्योतिष शास्त्र में इस दिन मौन व्रत रखने के लिए कहा गया है. मौन व्रत से मन शांत रहता है.
इस साल अमावस्या की तिथि 28 जनवरी को शाम 7 बजकर 35 मिनट पर शुरू हो जाएगी. इस तिथि का समापन 29 जनवरी को शाम 6 बजकर 5 मिनट होगा. ऐसे में इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी. इस दिन मौनी अमावस्या का व्रत भी रखा जाएगा. इसी दिन महाकुंभ में दूसरा अमृत स्नान भी किया जाएगा.
सूर्य देव कैसे दें अर्घ्य
आम दिनों की तरह ही मौनी अमावस्या पर भी सूर्योदय के समय ही भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर अर्घ्य देना तो और भी शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए. फिर साफ कपड़े पहनने चाहिए. एक साफ स्थान पर बैठना चाहिए. बैठते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. तांबे के लोटे में जल भरना चाहिए. जल में कुमकुम, चंदन और फूल डालना चाहिए. सूर्य देव को अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए. दोनों हाथों से तांबे का लोटा पकड़कर सूर्य देव को जल का अर्घ्य देना चाहिए. अर्घ्य देने के बाद भगवान सूर्य को प्रणाम करना चाहिए.
सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व
मौनी अमावस्या के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने से सेहत अच्छी रहती है. आध्यात्मिक विकास होता है. सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं. घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है. हर काम में सफलता मिलती है. रुके हुए काम पूरे होते हैं.
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