Prakash Parv 2025: बाबा नानक केवल एक साधु, संत या महात्मा नहीं थे, वे एक योद्धा और महाबली भी थे. जब बात जुल्म और अत्याचार की आती है, तो बाबा उसके ख़िलाफ़ डटकर खड़े होते हैं और किसी भी शासक को उसकी गलती बताने से नहीं डरते, चाहे वह मुगल शासक बाबर ही क्यों न हो. आइए गुरु पर्व के इस खास मौके पर जानते हैं बाबा नानक की वो कहानियां जिसमें उन्होंने लोगों और समाज को नई दिशा दिखाई.
जब मलिक भागो का टूटा अभिमान
सत्य और मेहनत की कमाई का संदेश देने के लिए, बाबा नानक ने एक साहूकार, मलिक भागो, का घमंड तोड़ा था. जब बाबा नानक अपनी तीर्थयात्रा पर निकले, तो वे एक गरीब बढ़ई, भाई लालो, के घर पहुंचे. लालो का गाँव सैदपुर के पास था. लालो आर्थिक रूप से गरीब थे, लेकिन आस्था और विश्वास में बहुत समृद्ध थे. मलिक भागो, जो उसी गाँव का एक धनी साहूकार था, ने एक भव्य भोज का आयोजन किया और नानक जी को भी आमंत्रित किया. लेकिन सतगुरु जी ने जाने से मना कर दिया. क्रोधित मलिक भागो बाबा नानक के पास आया और कहा कि उनके पास 36 तरह के खाने तैयार हैं, फिर भी वे क्यों नहीं आए.
मलिक भागो का घमंड तोड़ने के लिए, बाबा नानक जी ने एक हाथ में मलिक भागो की रोटी और दूसरे हाथ में भाई लालो की रोटी ली. चमत्कार देखिए, लालो की रोटी से दूध निकला और मलिक भागो की रोटी से खून! बाबा नानक ने साफ किया, “मलिक भागो, लालो अपनी मेहनत से रोटी कमाता है. उसका खाना भी पवित्र है. तुम लोगों के अधिकारों का हनन कर रहे हो.” यह दृश्य देखकर सब दंग रह गए. मलिक भागो का घमंड टूटा, और उसने बाबा नानक से माफ़ी मांगी, तथा हमेशा अपना हक़ और हलाल कमाने का प्रण लिया.
जब बाबा नानक ने बाबर को दी चुनौती
मेहनतकशों के पक्षधर बाबा नानक ने 1519 में मुग़ल शासक बाबर के आक्रमण के समय अत्याचार का खुलकर विरोध किया.1519 में बाबर ने काबुल से पंजाब पर हमला किया. उस समय बाबा नानक सैदपुर में थे, जहाँ बाबर की सेना ने लूटपाट मचाई, गरीबों को लूटा और निर्दोषों की हत्या की.निर्दोषों के नरसंहार का दृश्य देखकर, बाबा नानक ने बाबर को ललकारते हुए कहा कि “बाबर एक अत्याचारी है. तुम अपनी जीत के लिए निर्दोषों का नरसंहार कर रहे हो.” उन्होंने इस घटना का वर्णन अपनी बानी में भी किया. उस समय बाबर इतना शक्तिशाली था कि कोई भी, न ब्राह्मण, न काजी, उसकी उग्रता से डर के कारण धर्म की बात नहीं कर सकता था, लेकिन बाबा नानक निर्भीक होकर उसके सामने खड़े हुए.
बाबर का गुरूर और चक्की चलाने का चमत्कार
जब बाबा नानक ने बाबर को चुनौती दी, तो उसके सैनिकों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और कैद कर दिया. कारावास और चक्की: कैदखाने में बाबा नानक को चक्की चलाने का काम सौंपा गया.
कहते हैं, जिस चक्की को ईश्वर का हाथ लग जाए, वह धन्य हो जाती है. कुदरत ने ऐसा चमत्कार किया कि चक्की अपने आप चलने लगी. जब बाबर के सैनिकों ने यह अद्भुत घटना देखी, तो उन्होंने बाबर को इसकी सूचना दी. बाबर को अपनी गलती का एहसास हुआ. और खुद आकर बाबा नानक रिहा कर दिया. रिहाई के बाद, बाबा नानक ने बाबर से कहा कि अत्याचार से प्राप्त राज्य कभी अधिक समय तक नहीं टिकता. बाबर ने अपने किए की माफ़ी मांगी और बाबा नानक बाबर की कैद से आज़ाद होकर अपनी यात्रा पर निकल पड़े.
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