पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों का झुकाव चीन के तरफ बढ़ा है, जिसका असर शेयर बाजार पर देखने को मिला है. इस दौरान FII ने 1 लाख करोड़ रुपए बाजार से निकाल लिए हैं. 27 सितंबर को जब मार्केट ने नया हाई बनाया था. उसके बाद से वह लगभग 10 फीसदी नीचे आ चुका है, जिसमें निवेशकों के 48 लाख करोड़ रुपए डूब गए हैं. अब वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए ने एक नई रिपोर्ट पब्लिश की है, जिसमें बताया गया है कि अब ट्रंप के नए कार्यकाल में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर देखने को मिल सकता है. फर्म की इस रिपोर्ट ने निवेशकों में नई उम्मीद जगाई है.
निवेशक उठा सकते हैं ये कदम
मौजूद गिरावट को देखते हुए आप कुछ खास सेक्टर में पैसा लगाने के बारे में सोच सकते हैं. जिसमें फार्मा, एफएमसीजी और डिफेंसिव जैसे सेक्टर आते हैं. ये सेक्टर यहां से स्थिर रिटर्न देने की संभावना रखते हैं. फार्मा सेक्टर को स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने वाले सरकारी प्रोत्साहनों से लाभ होता है. ऐसा एक्सपर्ट का मानना है.
मार्केट एक्सपर्ट अनिरुद्ध गर्ग कहते हैं कि इस बीच FMCG कंपनियों की मांग स्थिर बनी हुई है, क्योंकि वे आवश्यक सामान उपलब्ध कराती हैं, जिनकी मांग आर्थिक चक्रों के बावजूद बनी रहती है. नकदी प्रवाह में यह स्थिरता और बाजार की अस्थिरता से सापेक्ष अलगाव FMCG को एक आकर्षक क्षेत्र बनाता है. सेम ऐसा ही डिफेंस सेक्टर का भी हाल है.
ये है टॉप सीक्रेट
इस समय निवेशकों को आक्रामक रिटर्न से हटकर पूंजी को सुरक्षित बचाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. वह कहते हैं कि अपने फंड को डायवर्सिफाई करना इस समय सबसे प्रमुख विषय हर एक निवेशक के लिए होना चाहिए. उसके बाद जब निवेश की बारी आए तो वह म्यूचुअल फंड और गोल्ड के बारे में विचार कर सकते हैं. हालांकि ईटी की रिपोर्ट की माने तो बाजार में अभी और गिरावट आ सकती है. ऐसे में अगर व्यक्ति अपने फंड को कुछ समय के गैप पर इंवेस्ट करे तो यह उसके लिए लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न का ऑप्शन बन सकता है.
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