सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) से एक याचिका में उठाए गए उन मुद्दों की जांच करने को कहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि खनन गतिविधि को सुविधाजनक बनाने के लिए हरियाणा में कालेसर वन्यजीव अभयारण्य के पास यमुना नदी पर तटबंध बनाया गया था. सीईसी का गठन शीर्ष अदालत के मई 2002 के आदेश के अनुसार अदालत के निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए किया गया था. जिसमें अतिक्रमण हटाने, कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन, प्रतिपूरक वनरोपण, वृक्षारोपण और अन्य संरक्षण मुद्दे शामिल हैं।
यह मामला न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आया था. आवेदक की तरफ से पेश अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने बेंच को बताया कि वन्यजीव अभयारण्य के पास नदी पर तटबंध बनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप नदी का प्रवाह हरियाणा से उत्तर प्रदेश की ओर हो गया. उन्होंने दावा किया कि यह अनियंत्रित खनन गतिविधि को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था.
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