क्लाउड पार्टिकल घोटाला, पंजाब के कई बैंक खाते फ्रीज

पंजाब

जालंधर : इंफोर्समेंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.) ने एक नए मोडस ऑपेरन्डी का पता लगाया है, जिसमे क्लाउड पार्टिकल घोटाले से संबंधित व्यूनाओ कम्पनी के विरुद्ध मनी लॉडरिंग की जांच शुरू की है। यह मोडस ऑपेरन्डी दो चरणों में संचालित होता है, जहां सबसे पहले निवेशकों को लुभाया जाता है और उन्हें क्लाउड पार्टिकल्स बेचा जाता है और फिर उसे वापस किराए पर लेकर अंतिम उपयोगकर्त्ताओं को किराए पर दे दिया जाता है। निवेशकों को बदले में ऊंचे दर पर किराए की प्राप्ति होती है।

दिलचस्प बात यह है कि असल में किराए पर दिए गए क्लाउड पार्टिकल्स के अनुरूप कोई भौतिक बुनियादी ढांचा कंपनी के पास मौजूद नहीं है। निवेशकों को लंबी अवधि में ठगा जाता है और इसका पता लगाना कठिन होता है, क्योंकि पीड़ित क्लाउड पार्टिकल्स में अपने निवेश पर लगातार उच्च अवधि तक किराए का लाभ उठाते रहते हैं। हालांकि वह इस तथ्य से अनभज्ञि रहते हैं कि ऐसा कोई डिजिटल बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं है।

सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय ने व्यूनाओ समूह की कंपनियों द्वारा अनियमित और अनधिकृत विदेशी धन प्रेषण और डेटा भंडारण की सेवाओं को किराए पर देने की आड़ में निवेशकों के पैसे की धोखाधड़ी की है जिसकी जांच ई.डी. ने शुरू की है।

ई.डी ने सबसे पहले अनियमित विदेशी धन प्रेषण के संबंध में कथित फेमा उल्लंघनों की जांच शुरू की। फेमा जांच के दौरान देश भर में 14 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप 30.50 लाख रुपए की भारतीय मुद्रा, 6410 यूरो, 3062 यू.एस.डी., 5 सिंगापुर डॉलर, 2750 स्विस फ़्रैंक की विदेशी मुद्रा, डिजिटल डिवाइस और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं।

गौरतलब है कि व्यूनाओ समूह के प्रमुख प्रमोटर तलाशी की कार्रवाई में शामिल नहीं हुए। व्यूनाओ समूह क्लाउड पार्टिकल्स (सर्वर) की खरीद के बदले निवेशकों को अवास्तविक रिटर्न का वादा कर रहा था। रिटर्न प्रति वर्ष 40 प्रतिशत से अधिक था। हालांकि, बिक्री या किराए पर आवश्यक संख्या में क्लाउड पार्टिकल्स (सर्वर) प्रदान करने के लिए उनके पास आनुपातिक बुनियादी ढांचा नहीं था। यह उनके डेटा केंद्रों की तलाशी के दौरान ई.डी. द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान पता चला है।

लोगों को लुभाने के लिए व्यूनाओ ने भव्य कार्यालय स्थापित किए थे, जहां वे निवेशकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आकर्षक रिटर्न की पेशकश करके उनसे डेटा पार्टिकल्स खरीदने की डील करते थे, जिससे कई निवेशक जाल में फंस जाते थे। ई.डी. ने पी.एम.एल.ए.. 2002 की धारा 66(2) के तहत सूचना, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस, उत्तर प्रदेश को भेजी थी, जिन्होंने धोखाधड़ी की गतिविधियों का संज्ञान लिया और उक्त सूचना के आधार पर बी.एन.एस., 2023 की धारा 318 (4), 61 (2) और 316 (2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। तदनुसार ई.डी. जालंधर ने भी पी.एम.एल.ए. के तहत जांच शुरू की और पंजाब और यू.पी. में 5 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें विभिन्न दस्तावेज जब्त किए गए। तलाशी के दौरान,व्यूनाओ समूह की कंपनियों और संबंधित संस्थाओं/व्यक्तियों के 67 बैंक खातों को पी.एम.एल.ए.. 2002 के प्रावधानों के तहत फ्रीज कर दिया गया।

जांच में प्रारंभिक स्तर पर यह पाया गया है कि भारत भर में 25,000 से अधिक निवेशकों (जिनमें से अधिकांश पंजाब, हरियाणा और यू.पी. से हैं) ने व्यूनाओ ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ से क्लाउड पार्टिकल्स खरीदे हैं और आजतक व्यूनाओ ग्रुप को विभिन्न निवेशकों को ऐसे क्लाउड पार्टिकल्स की बिक्री के बदले लगभग 2200 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं।

व्यूनाओ ग्रुप कम्पनीज ने दिल्ली एवं पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में ई.डी. की जांच और बैंक खातों की फ्रीजिंग को चुनौती दी। आज दोनों पक्षों को लगभग 1 घंटे सुनने के बाद माननीय दिल्ली उच्च न्यायलय ने कंपनी को कोई भी अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। ई.डी. अभी कई पहलुओं पर मामले की जांच करेगी।

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