कोरबा के देवपहरी वाटरफॉल में रातभर चट्टान पर फंसे रहे 3 दोस्त: 15 घंटे बाद SDRF ने बोट और रस्सी से किया सुरक्षित रेस्क्यू

छत्तीसगढ़

कोरबा (छत्तीसगढ़): जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल देवपहरी जलप्रपात (Devpahari Waterfall) में पिकनिक मनाने पहुंचे तीन युवक अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव के बीच फंस गए।

सोमवार शाम से लेकर मंगलवार सुबह तक तीनों युवक नदी के बीच स्थित एक चट्टान पर रातभर फंसे रहे। मंगलवार सुबह एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय लेमरू थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने 15 घंटे के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बोट और रस्सियों के सहारे तीनों को सकुशल बाहर निकाल लिया।

⛰️ पिकनिक मनाने पहुंचे थे तीन दोस्त, जलस्तर बढ़ने से चट्टान पर फंसे

घटना की पृष्ठभूमि और युवकों का विवरण:

  • युवकों की पहचान: फंसे युवकों की पहचान घनश्याम महंत, हिमेश सारथी और धनेश्वर सारथी के रूप में हुई है, जो लेमरू के पास श्यांग और गुरमा गांव के निवासी हैं।

  • अचानक बढ़ा बहाव: तीनों दोस्त नदी के बीच स्थित उथली चट्टान पर बैठकर झरने का नजारा देख रहे थे कि अचानक ऊपरी क्षेत्र में बारिश के चलते नदी का बहाव अत्यंत तेज हो गया।

  • किनारे आने का रास्ता बंद: देखते ही देखते चट्टान के दोनों ओर पानी का तेज प्रवाह शुरू हो गया, जिससे तीनों किनारे तक नहीं पहुंच सके और उन्होंने फोन कर पुलिस व परिजनों को सूचना दी।

🚤 रात के अंधेरे और तेज बहाव ने बढ़ाई चुनौती, सुबह बोट से हुआ रेस्क्यू

रेस्क्यू ऑपरेशन का ब्योरा:

  • पुलिस व SDRF की तत्परता: सूचना मिलते ही लेमरू थाना प्रभारी लोकनाथ यादव पुलिस बल के साथ पहुंचे और SDRF टीम को मौके पर बुलाया गया।

  • रात में रुका ऑपरेशन: पानी का बहाव अत्यधिक तेज होने और अंधेरा घिर जाने के कारण रात में रेस्क्यू संभव नहीं हो सका। टीम ने युवकों को रातभर चट्टान पर सुरक्षित टिके रहने की हिदायत दी।

  • सुबह सफल बचाव: मंगलवार सुबह अभियान पुनः प्रारंभ किया गया और सुबह 9 से 10 बजे के मध्य SDRF ने बोट व सुरक्षा रस्सियों की मदद से तीनों युवकों को सुरक्षित तट पर पहुंचा दिया।

⚠️ पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों का अभाव, जोखिम उठा रहे युवा

सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय चुनौतियां:

  • चेतावनी के बावजूद लापरवाही: मानसून के दौरान प्रशासन द्वारा चेतावनी जारी किए जाने के बावजूद पर्यटक खतरनाक चट्टानों और तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने का जोखिम उठा रहे हैं।

  • सुरक्षा कर्मियों की कमी: जलप्रपात के आसपास पर्यटकों को खतरनाक क्षेत्रों में जाने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा घेरा या निगरानी तंत्र मौजूद नहीं है।

  • पूर्व की घटनाएं: देवपहरी में पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर पर्यटकों के फंसने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे पर्यटन स्थलों पर स्थायी सुरक्षा प्रबंध किए जाने की मांग उठ रही है।

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