कुत्ते को राखी बांधने वाले विज्ञापन पर विवाद: कृति सेनन के ऐड पर भड़के काशी के विद्वान, बताया सनातन परंपरा के विरुद्ध

धार्मिक

वाराणसी/मुंबई: रक्षाबंधन के पावन पर्व से पूर्व एक प्रमुख ज्वैलरी ब्रांड का नया विज्ञापन सोशल मीडिया पर चर्चा और तीखे विवाद का केंद्र बन गया है। इस विज्ञापन में बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन एक पालतू कुत्ते को राखी बांधती हुई नजर आ रही हैं। विज्ञापन जारी होते ही इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। जहां कुछ लोग इसे पालतू पशुओं के प्रति प्रेम और भावनात्मक लगाव का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों और काशी के धार्मिक विद्वानों ने इसे सनातन संस्कृति और रक्षाबंधन के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

🛕 काशी के विद्वानों ने जताया कड़ा विरोध: ‘व्यापारीकरण ने बिगाड़ा रक्षाबंधन का स्वरूप’

धर्माचार्यों की आपत्तियां और पौराणिक संदर्भ:

  • सनातनी परंपरा के विरुद्ध: काशी के विद्वान आचार्य पवन त्रिपाठी ने विज्ञापन को सनातन विरोधी करार देते हुए कहा कि रक्षाबंधन एक पवित्र वैदिक परंपरा है, लेकिन आधुनिक व्यापारीकरण के चलते इसका मूल स्वरूप विकृत किया जा रहा है।

  • रक्षा सूत्र का ऐतिहासिक महत्व: उन्होंने बताया कि वैदिक काल में पुरोहित अपने यजमानों को और गुरु अपने शिष्यों को रक्षा सूत्र बांधते थे। पौराणिक मान्यता है कि देवासुर संग्राम के दौरान इंद्राणी ने देवराज इंद्र की विजय और रक्षा की कामना के लिए रक्षा सूत्र बांधा था।

  • कर्तव्य और संकल्प: कालान्तर में यह परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में परिवर्तित हुई, जहां बहन भाई की मंगल कामना करती है और भाई आजीवन उसकी रक्षा का संकल्प लेता है।

  • मर्यादा का सवाल: आचार्य ने स्पष्ट किया कि पालतू जीवों की सेवा, उन्हें भोजन कराना और उनकी देखभाल करना पूर्णतः धर्मसम्मत व प्रशंसनीय है, किंतु कुत्ते को पवित्र रक्षा सूत्र या मौर पहनाना धार्मिक दृष्टि से अनुचित है।

📜 ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय उपाध्याय ने किया मंत्र का उल्लेख: ‘शास्त्रों में निश्चित है विधान’

वैदिक मंत्र और ज्योतिषीय दृष्टिकोण:

  • रक्षा सूत्र मंत्र का भाव: ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय उपाध्याय ने सनातन परंपरा के प्रसिद्ध रक्षा सूत्र मंत्र का हवाला दिया:

    “येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

  • मंत्र का शास्त्रीय अर्थ: जिस प्रकार दानवों के महाबली राजा बलि को रक्षा सूत्र में बांधा गया था, उसी संकल्प के साथ यह सूत्र बांधा जाता है ताकि धारक अपने धर्म और संकल्प की रक्षा कर सके।

  • अनुष्ठान की मर्यादा: ज्योतिषाचार्य के अनुसार, रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं बल्कि धार्मिक संकल्प और अनुष्ठान से बंधी विधा है, जिसे कमर्शियल विज्ञापनों में मनमाने ढंग से प्रस्तुत करना शास्त्र सम्मत नहीं है।

🐕 क्या पालतू जानवरों को राखी बांधना धर्म सम्मत है?

शास्त्र और परंपरा का निष्कर्ष:

  • कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं: सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों, धर्मशास्त्रों और कर्मकांड विधि में पशुओं को रक्षाबंधन का वैदिक रक्षा सूत्र बांधने का कोई विधान या अनिवार्य परंपरा नहीं है।

  • प्रेम बनाम धार्मिक अनुष्ठान: शास्त्रों के अनुसार, मूक प्राणियों के प्रति करुणा और सेवा धर्म का अंग है, लेकिन रक्षाबंधन का अनुष्ठानिक रक्षा सूत्र मनुष्यों के पारस्परिक दायित्व, सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक है। इसी अंतर और धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन को लेकर विद्वान इस विज्ञापन का विरोध कर रहे हैं।

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