एक ब्लॉगर के खुलासे से हिला चीन का विज्ञान जगत: NSFC ने शुरू की फर्जी रिसर्च की देशव्यापी जांच

विदेश

बीजिंग (चीन): चीन में पीएचडी छोड़ चुके एक पूर्व शोध छात्र और लोकप्रिय सोशल मीडिया ब्लॉगर गेंग होंगवेई (जिन्हें ऑनलाइन ‘स्टूडेंट गेंग’ कहा जाता है) की एक मुहिम ने पूरे देश के वैज्ञानिक और शैक्षणिक जगत में भूचाल ला दिया है।

गेंग ने चीनी विश्वविद्यालयों के प्रकाशित शोध पत्रों में फर्जी आंकड़ों और मनगढ़ंत प्रयोगों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके खुलासों के बाद मामला इतना बड़ा बन गया कि देश में बेसिक रिसर्च को फंड करने वाली सर्वोच्च सरकारी संस्था—चीन के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान फाउंडेशन (NSFC)—को व्यापक स्तर पर अकादमिक भ्रष्टाचार की जांच बैठानी पड़ी।

📊 31 संस्थानों के 40 से ज्यादा शोधकर्ताओं पर कार्रवाई: इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक खुलासा

जांच का दायरा और संस्थानों पर कार्रवाई:

  • संस्थानों की सूची: NSFC ने 26 अगस्त को एक विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए देश की 31 प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और अस्पतालों से जुड़े 31 नए फर्जीवाड़े के मामलों को उजागर किया।

  • 40 से ज्यादा वैज्ञानिक दोषी: इस जांच में 40 से अधिक प्रमुख वैज्ञानिक, प्रोफेसर और रिसर्च स्कॉलर्स सीधे तौर पर डेटा हेरफेर के दोषी पाए गए हैं।

  • ऐतिहासिक कार्रवाई: इसे चीनी विज्ञान फाउंडेशन के इतिहास में अकादमिक कदाचार (Academic Misconduct) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और पारदर्शी सार्वजनिक कार्रवाई माना जा रहा है।

👤 कौन हैं ‘स्टूडेंट गेंग’? बायोलॉजी में मास्टर्स से लेकर व्हिसलब्लोअर बनने तक का सफर

गेंग होंगवेई का परिचय और पृष्ठभूमि:

  • शैक्षणिक योग्यता: गेंग होंगवेई कोई सरकारी अधिकारी नहीं, बल्कि रिसर्च बैकग्राउंड से आने वाले एक प्रतिबद्ध साइंस कम्युनिकेटर हैं। उन्होंने जिलिन यूनिवर्सिटी से बायोलॉजी में ग्रेजुएशन और मास्टर्स की डिग्री हासिल की।

  • बायोमेडिकल में पीएचडी: इसके उपरांत उन्होंने प्रतिष्ठित बेइहांग यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में अपनी डॉक्टरेट (PhD) शुरू की थी।

🚪 डेटा हेरफेर से इनकार कर छोड़ी PhD: असली नाम से शुरू की फर्जीवाड़े के खिलाफ जंग

मुहिम की शुरुआत और सोशल मीडिया पर प्रभाव:

  • पीएचडी छोड़ने का कारण: रिपोर्ट के अनुसार, गेंग के सुपरवाइजर ने उन पर रिसर्च के प्रायोगिक आंकड़ों (Experimental Data) में हेराफेरी करने का दबाव बनाया, जिसे अस्वीकार करते हुए उन्होंने अपनी पीएचडी बीच में ही छोड़ दी।

  • खुलासे का अनूठा तरीका: अप्रैल 2026 से उन्होंने सोशल मीडिया पर अकादमिक फ्रॉड के खिलाफ अभियान शुरू किया। वे बड़े वैज्ञानिकों के पेपर्स का तकनीकी विश्लेषण कर वीडियो पोस्ट करते थे।

  • असली पहचान के साथ चुनौती: अधिकांश व्हिसलब्लोअर्स के विपरीत गेंग ने छद्म नाम के बजाय अपने असली नाम से शीर्ष वैज्ञानिकों पर आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर उनके करीब 20 लाख फॉलोअर्स हो चुके हैं और उनके खुलासों के बाद कई संस्थानों को अपने शोधकर्ताओं को डिमोट व बर्खास्त करना पड़ा है।

🚫 4 शीर्ष प्रोफेसरों पर गाज: छीनी गई 1 करोड़ युआन से अधिक की ग्रांट, लगा लंबा बैन

बड़े नामों पर सख्त प्रतिबंध और वित्तीय वसूली:

  • राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक: गेंग के निशाने पर आए चार शीर्ष प्रोफेसर देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विज्ञान कोष द्वारा ‘युवा विद्वान’ सम्मान से नवाजे जा चुके थे और अपने-अपने विभागों में डीन या एसोसिएट डीन के पदों पर आसीन थे।

  • ग्रांट वापसी का आदेश: NSFC ने इन चारों प्रोफेसरों के सम्मान रद्द करते हुए उन्हें मिले 1 करोड़ युआन से अधिक (करोड़ों रुपये) के रिसर्च फंड को तुरंत सरकारी खजाने में लौटाने का आदेश दिया है।

  • रिसर्च फंडिंग पर प्रतिबंध: संस्था ने भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने के लिए इन वरिष्ठ प्रोफेसरों पर 3 से 7 वर्षों तक किसी भी नए रिसर्च ग्रांट या प्रोजेक्ट के आवेदन करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

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