ईरान में मानवाधिकारों का हनन! खोमेनेई के देश में क्यों भड़की विरोध की आग? हर रोज़ 4 लोगों को दी जा रही है फाँसी

विदेश

ईरान में इस समय सजा-ए-मौत को लेकर लोगों का गुस्सा फूटा है. खोमेनेई के खिलाफ ही देश में विरोध की आग सुलग रही है. दरअसल, तेहरान में मौत की सजा सुननाने की संख्या बढ़ती जा रही है. जिसको लेकर अब 800 ईरानी कार्यकर्ताओं, जिनमें राजनीतिक कैदी भी शामिल हैं, ने शुक्रवार को इसीक निंदा करते हुए इसे दमन का उपकरण कहा.

ईरान में सिर्फ अक्तूबर के महीने में ही मानवाधिकार समूहों ने 280 लोगों को फांसी दी है. एक संयुक्त बयान में विभिन्न विचारधाराओं के नागरिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने देश की आलोचना करते हुए कहा कि उसने फांसी को नियंत्रण और दमन का साधन बना दिया है.

280 लोगों को अक्टूबर में दी गई फांसी

ईरान ह्यूमन राइट्स सोसाइटी ने बुधवार को बताया कि 22 अक्टूबर को देशभर में 28 कैदियों को फांसी दी गई, जिससे अक्टूबर महीने में कुल फांसीयों की संख्या 280 तक पहुंच गई.

संस्था ने अक्टूबर को 1988 की सामूहिक फांसीयों के बाद कैदियों के लिए सबसे खूनी महीना बताया. रिपोर्ट में कहा गया कि ज्यादातर मौतें नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों या हत्या के मामलों से जुड़ी थीं, जिनमें कई अफगान नागरिक भी शामिल थे. कई बार फांसी परिवारों को सूचित किए बिना या अंतिम मुलाकात की अनुमति दिए बिना दी गई.

लोगों ने उठाई आवाज

शुक्रवार को जारी एक बयान, जिस पर कई राजनीतिक कैदियों ने हस्ताक्षर किए, में फांसी की इस लहर को—खासकर तेहरान के पश्चिम में स्थित गॉजल हेसार जेल में—न्यायपालिका के नैतिक और कानूनी पतन और मानव गरिमा के प्रति खुले अपमान का प्रमाण बताया गया.

हस्ताक्षरकर्ताओं ने गॉजल हेसार जेल के राजनीतिक कैदियों की ओर से शुरू किए गए ट्यूज़्डेज़ अगेंस्ट एग्ज़िक्यूशन्स अभियान की सराहना की, जो एक साल से अधिक समय से चल रहा है. इस अभयिान में कैदी फांसी की सजा का हर हफ्ते भूख हड़ताल के जरिए विरोध करते हैं.

अब तक कितने लोगों को दी गई फांसी?

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 16 अक्टूबर को सभी फांसियों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की, यह कहते हुए कि 2025 की शुरुआत से अब तक ईरान में 1,000 से अधिक लोगों को फांसी दी जा चुकी है. यानी औसतन रोजाना देश में 4 लोगों को फांसी दी जा रही है.

ईरानी अखबार शरग में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच ईरान में कम से कम 88 सार्वजनिक फांसी दी गईं. रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रथा — जिसे अक्सर बच्चों सहित बड़ी भीड़ देखती है — हाल के वर्षों में घटने के बावजूद हिंसक अपराधों को कम करने में विफल रही है.

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