अमेरिका की बर्बन व्हिस्की से निपटने के लिए भारतीय कंपनियों ने 3500 करोड़ रुपये का एक बड़ा प्लान तैयार किया है. भारत में शराब के बाजार में भारी बढ़ोतरी हो रही है. बढ़ती आय और ग्लोबल एक्सपोजर की वजह से खासकर युवाओं की बड़ी संख्या बढ़ोतरी हो रही है. भारत के बड़े शराब निर्माता जैसे यूनाइटेड ब्रेवरीज़, AB InBev और कार्ल्सबर्ग 2025 में 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश करेंगे. यह इन कंपनियों का पिछले एक दशक का सबसे बड़ा निवेश होगा.
भारत ने बर्बन व्हिस्की पर आयात शुल्क घटाकर 50 फीसदी कर दिया है. यह अमेरिका के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की तैयारी का हिस्सा है. इसके अलावा, वाइन और अन्य शराबों पर भी आयात शुल्क में कटौती की गई है. इससे यह साफ होता है कि अमेरिकी शराब निर्माता भारत को एक बड़ा बाजार मानते है. कई देशों की कंपनियां इसमें हिस्सा लेना चाहती हैं.
आंकड़े कर रहे सब बयां
भारत ने ऑस्ट्रेलियाई वाइन पर शुल्क घटाया है. ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और स्विट्जरलैंड जैसी जगहों से भी आयात शुल्क घटाने की मांग हो रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शराब इंडस्ट्री की कीमत 2021 में लगभग 52.4 बिलियन डॉलर थी. यह साल 2025 तक 64 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इससे भारत ग्लोबल शराब बाजार का पांचवां सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन सकता है.
भारतीय शराब इंडस्ट्री हर साल 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक राजस्व सरकार को देता है. इसके अलावा, यह किसानों, खाद्य और पेय पदार्थ, पर्यटन, और पैकेजिंग जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार भी पैदा करता है. भारत की बढ़ती मध्यम वर्ग की आबादी और युवाओं का रुझान शराब की तरफ इसके विकास में सहायक साबित हो रहा है. हालाँकि ‘मेक इन इंडिया’ जैसी नीति विदेशी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है.
विदेशी कंपनियों की नजर भारतीय बाजार पर
भारतीय कंपनियों के पास मजबूत ब्रांड और उत्पाद पोर्टफोलियो है. विदेशी कंपनियों को इस बाजार में भारतीय कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा. भारतीय शराब निर्माता विदेशी शराब के सस्ते आयात को लेकर चिंता भी व्यक्त कर रहे हैं और सरकार से कदम उठाने की अपील कर रहे हैं.
भारत में शराब का बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है. भारतीय शराब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी से पहचान बना रही है. सरकार का टारगेट अगले कुछ सालों में 1 बिलियन डॉलर का निर्यात करना है. 2023-24 में भारत का शराब निर्यात 2200 करोड़ रुपये से अधिक था. प्रमुख निर्यात स्थल यूएई, सिंगापुर, नीदरलैंड्स और कई अफ्रीकी देश हैं.
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