अब भोपाल की ट्रेनों में मिलेंगी दूध जैसी सफेद ‘तकिया-चादरें’, मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री से यात्रियों को साफ लिनन भेजा जाएगा

मध्य प्रदेश

भोपाल। ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को अब गंदे चादर और तकिए की शिकायतों से निजात मिलने वाली है। रेलवे प्रशासन भोपाल स्टेशन के पास लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से 31,161 वर्ग फुट क्षेत्र में नई और अत्याधुनिक मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री तैयार कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, इसका करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य है कि यह लान्ड्री नए साल से पूरी तरह शुरू हो जाए।

नई लॉन्ड्री पूरी तरह से मशीनों के जरिए ऑटोमैटिक प्रोसेस पर काम करेगी। यहां यात्रियों के लिए चादर, तकिया कवर, तौलिए और कंबल की धुलाई, प्रेस और पैकिंग होगी। इसके बाद इन्हें साफ-सुथरी पैकिंग में ट्रेनों तक पहुंचाया जाएगा।

पुरानी लॉन्ड्री से ज्यादा क्षमता

रेलवे पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि 2017 में बनी पुरानी लान्ड्री में रोजाना करीब 8,000 चादरें धुलती थीं। नई लॉन्ड्री के शुरू होने पर इसकी क्षमता बढ़कर 12,000 चादरें प्रतिदिन हो जाएगी।

नई लॉन्ड्री में प्रतिदिन 6,000 पैकेट तैयार होंगे (एक पैकेट में 2 बेडशीट और 1 नैपकिन)।

वर्तमान में पुरानी लॉन्ड्री से 4,000 पैकेट रोजाना तैयार किए जाते हैं।

संचालन में हर महीने करीब 4,190 यूनिट बिजली और रोजाना लगभग 9,78,530 लीटर पानी की खपत होगी।

लॉन्ड्री संचालन की प्रक्रिया

1. ट्रेनों से गंदा लिनन लाकर अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाएगा।

2. बड़े आकार की मशीनों (60 किलो, 120 किलो और 126 किलो क्षमता) में धुलाई होगी।

3. धुले हुए लिनन को मशीनों से प्रेस और ड्राई किया जाएगा।

4. साफ-सुथरा लिनन पैक होकर फिर से ट्रेनों में भेजा जाएगा।

नई लॉन्ड्री के फायदे

  • पूरी प्रक्रिया मैकेनाइज्ड होने से समय की बचत।
  • यात्रियों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण लिनन मिलेगा।
  • शिकायतों में कमी और बेहतर अनुभव।

लिनन की कोडल लाइफ

सफेद बेडशीट (12 माह), पॉलिवस्त्र बेडशीट (24 माह), सफेद तकिया कवर (9 माह), पॉलिवस्त्र तकिया कवर (9 माह), हाथ तौलिया (9 माह), नहाने का तौलिया (9 माह), नरम कंबल (2 वर्ष), मिंक कंबल (4 वर्ष), फोम तकिया (2 वर्ष), पॉलिवस्त्र तकिया (24 माह)

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