अतिक्रमण के खिलाफ चला अभियान, विरोध में उतरे लोग, महाकाल मंदिर की ओर जाने वाला रास्ता रोका

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग स्थित बेगम बाग कॉलोनी से आज सुबह अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया. इसकी जानकारी जैसे ही एक समाज के लोगों को लगी तो उन्होंने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया. इससे कुछ देर के लिए महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग बाधित रहा. हालांकि, बाद में अधिकारियों के समझाने के बाद लोग मान गए.

उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि हरिफाटक ओवर ब्रिज से महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग के बीच बेगमबाग कॉलोनी है. लगभग डेढ़ वर्षो पहले इस मार्ग पर 28 ऐसी प्रॉपर्टी को चिन्हित किया गया था, जिस पर लीज की शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा था. कुछ लोगों ने बिना परमिशन के दो संपत्तियों को एक कर निर्माण कर लिया गया था तो कुछ संपत्तियों ऐसी भी थीं, जिन्हें रेसीडेंशियल उपयोग के लिए दिया गया था, लेकिन इसका उपयोग व्यावसायिक तौर पर किया जा रहा था. इन

संदीप सोनी ने बताया कि 28 संपत्तियों की सबसे पहले लीज निरस्त की गई, जिसके वर्तमान में 50 से 60 भाग हो चुके थे. लीज निरस्त होने पर इसे अतिक्रमण मान लिया जाता है. इसीलिए मकान नंबर 49 और 55 से कब्जा हटाने की कार्यवाई करने आज पुलिस प्रशासन और निगम की टीम पहुंची थी.

लोगों ने जताया विरोध

आज सुबह जैसे ही बेगम बाग में पुलिस और प्रशासन द्वारा कब्जा हटाने की कार्यवाही की जानकारी एक समाज के लोगों तक पहुंची, वैसे ही सभी बेगम बाग पहुंचे और उन्होंने सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस ने कानून व्यवस्था संभालते हुए लोगों को इस प्रकार का प्रदर्शन न करने की समझाईश दी, लेकिन जब वह नहीं माने तो प्रशासनिक अधिकारियों ने लीज निरस्त होने और माननीय उच्च न्यायालय आदेशों के तहत कार्यवाही किए जाने के बाद लोगों को बताई जिसके बाद यह प्रदर्शन खत्म हुआ. याद रहे कि यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर पहुंचने का मार्ग भी है, जिसे इस प्रदर्शन के दौरान रोका गया था.

अभी दो संपत्तियों से कब्जा हटाया

उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि बेगमबाग क्षेत्र के लगभग 28 प्रॉपर्टी की लीज निरस्त की गई है. अभी सिर्फ हमने दो संपत्तियों का कब्जा हटाया है. आने वाले दिनों में अन्य संपत्तियों का कब्जा हटाने की कार्यवाही भी की जाएगी. वैसे तो इन्हें सितंबर 2024 में ही लीज निरस्त की सूचना दे दी गई थी, लेकिन अभी कुछ संपत्तियों के मामले न्यायालय में विचाराधीन है. इन पर जैसे-जैसे फैसले आते जाएंगे वैसे-वैसे कार्यवाही की जाएगी.

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