लुधियाना: नगर निगम के अफसरों ने किनारे पर लाइन बिछाने के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बाद बुड्ढे नाले में सीधे तौर पर सीवरेज का पानी गिरने का दावा तो कर दिया है, लेकिन उन्हें हैबोवाल डेयरी कांप्लेक्स में से बुड्ढे नाले में सीधे तौर पर गिर रहा गोबर का नाला कभी नजर नही आया।
यह खुलासा बुड्ढे नाले में प्रदूषण की समस्या के गुनहगारों को पकड़ने के लिए हो रही सैंपलिंग के दौरान डाइंग मालिकों ने किया है। यहां बताना उचित होगा कि डीसी के ऑर्डर पर नगर निगम व पीपीसीबी द्वारा बुड्ढे नाले की जो सैंपलिंग शुरू की गई है, उसके तहत डाइंग यूनिट 36 घंटे के लिए बंद किए गए हैं। यह डेडलाइन खत्म होने से पहले जब दोबारा टीमें फील्ड में उतरी तो डाइंग मालिक भी उनके साथ मौजूद थे। इस दौरान हैबोवाल डेयरी कांप्लेक्स में से बुड्ढे नाले में सीधे तौर पर गिर रहा गोबर का नाला सामने आया है, जिसे बुड्ढे नाले में प्रदूषण का लेवल बढ़ने की मुख्य वजह माना जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक डाइंग मालिकों द्वारा इस संबंध में वीडियो बनाकर वायरल कर दी गई है। जिसकी शिकायत चीफ सेक्रेटरी व साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के जरिए सरकार के पास पहुंच गई है, जिसे लेकर नगर निगम अफसरों में हलचल देखने को मिल रही है।
डाइंग यूनिट बंद रहने के बावजूद फीका नहीं हुआ पानी का रंग
एक तरफ जहां डाइंग यूनिट बंद रहने के बावजूद जमालपुर एसटीपी पर काले रंग का पानी पहुंच रहा है। वहीं, सतलुज दरिया में मिलने वाले प्वाइंट पर भी पानी का रंग फीका नही हुआ। वो भी उस समय जब बुड्ढे नाले में प्रदूषण का लेवल डाउन करने के लिए नीलों से साफ पानी भी रेगुलर छोड़ा जा रहा है। जिसके चलते इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिटों पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं।
एनजीओ के सदस्य भी हुए लामबंद
बुड्ढे नाले में प्रदूषण की समस्या को लेकर एनजीओ के सदस्यों ने भी मोर्चा खोला हुआ है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर बुड्ढे नाले में प्रदूषण की समस्या न हुआ तो सतलुज दरिया पर मिलने वाले प्वाइंट पर बांध लगा दिया जाएगा। क्योंकि बुड्ढे नाले के पानी की वजह से मालवा से लेकर राजस्थान तक के लोग जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहें हैं। यह एनजीओ के सदस्य लुधियाना में लामबंद हुए और 24 अगस्त को फिरोजपुर रोड पर रोष मार्च निकालने की घोषणा की गई।
