मौसम को सुहाना बनाने का काम बारिश का होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा बारिश काम आती है प्रदूषण को कम करने में. खासकर बात जब देश की राजधानी दिल्ली के प्रदूषण की हो तो यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है. ऐसे में IIT कानपुर को पहली बार ‘कृत्रिम बारिश’ कराने के लिए क्लाउड सीडिंग (बारिश के बीज बोने) की अनुमति मिली और दिल्ली में सफलता पूर्वक इसको अंजाम भी दिया गया. इसके लिए जिस एयरक्राफ्ट को जिम्मेदारी दी गई थी, वो अपना मिशन पूरा करके चार घंटे में बेस पर वापस आ गया.
IIT कानपुर कराएगा कृत्रिम बारिश
दिल्ली और दूसरे प्रदूषण वाले शहरों में कृत्रिम बारिश की टेक्नोलॉजी IIT कानपुर ने काफी पहले तैयार कर ली थी. इसके लिए नमी वाले बादलों में क्लाउड सीडिंग की जाती है. इससे उस जगह पर बारिश कराई जा सकती है. IIT कानपुर काफी समय से प्रयास कर रहा था कि इसकी अनुमति मिल जाए और आखिरकार दिल्ली सरकार ने दिवाली बाद की अनुमति दे दी. अनुमति मिलने के बाद IIT कानपुर की एयर स्ट्रिप से एयरक्राफ्ट ने 2 बजे उड़ान भरी और क्लाउड सीडिंग करके 6 बजे तक वापस अपने बेस पर आ गया.
दिल्ली के बुराड़ी में हुआ सफल टेस्ट
IIT कानपुर के डायरेक्टर मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में इसका सफल टेस्ट किया गया. उन्होंने बताया कि वहां पर बादल नहीं थे. इसलिए बारिश नहीं हो पाई, लेकिन सभी सिस्टम अच्छे से चेक कर लिए गए हैं. अब जब भी बादल होंगे, तब क्लाउड सीडिंग के द्वारा बारिश करवा दी जाएगी.
CM रेखा गुप्ता ने किया था ट्वीट
दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने इस मौके पर ट्वीट करते हुए कहा कि, दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग के माध्यम से कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. आज विशेषज्ञों द्वारा बुराड़ी क्षेत्र में इसका सफल टेस्ट किया गया है. मौसम विभाग ने 28, 29 और 30 अक्टूबर को बादलों की उपस्थिति की संभावना जताई है.”
“यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 29 अक्टूबर को दिल्ली पहली कृत्रिम बारिश का अनुभव करेगी. यह पहल न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने का एक वैज्ञानिक तरीका भी स्थापित करने जा रही है. सरकार का उद्देश्य है कि इस नवाचार के माध्यम से राजधानी की हवा को स्वच्छ और वातावरण को संतुलित बनाया जा सके.
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