बिहार के वैशाली जिले में भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी दारोगा सुमन जी झा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है. डीआईडी चंजन कुशवाहा ने लालगंज थाना में तैनात दारोगा सुमन जी झा को चोरी और गबन के एक मामले में बर्खास्त कर दिया है. दारोगा पर सोना-चांदी के आभूषण और करीब 15 लाख रुपये नकद गबन करने का आरोप था. साथ ही रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे थे. डीआईजी के इस सख्त एक्शन से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है.
दारोगा पर लगे आरोपों की जांच के बाद जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. जानकारी के अनुसार, सुमन जी झा इससे पहले मुजफ्फरपुर के शिवाईपट्टी थाने में तैनात थे. वर्ष 2024 में निगरानी विभाग की टीम ने उन्हें 11 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. इस मामले में उन्हें जेल भी भेजा गया था. हालांकि, जमानत मिलने के बाद उनका तबादला कर दिया गया, जबकि विभागीय कार्रवाई जारी रही. इस मामले की जांच के लिए अनुमंडल पुलिस अधिकारी पूर्वी-2 मनोज सिंह को जिम्मेदारी दी गई थी. जांच में रिश्वतखोरी के आरोप सही पाए गए और दरोगा को दोषी करार दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता पवन कुमार ने सर्विलांस टीम पटना में शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़ित ने बताया था कि दारोगा सुमन झा उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं. मामला सही पाए जाने पर दारोगा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद, 4 सितंबर 2024 की शाम करीब 5 बजे निगरानी टीम ने शिवाईपट्टी थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए दरोगा सुमन झा को शिकायतकर्ता से 11 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था. इस मामले में उन्हें दोषी भी पाया गया था. इस बीच, उनके खिलाफ वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में बरामद करीब 1.5 किलोग्राम सोना तथा बड़ी मात्रा में नकदी से जुड़े मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें वे नामजद आरोपी हैं.
डीआईजी ने किया बर्खास्त
पुलिस विभाग की छवि को देखते हुए और भ्रष्टाचार में संलिप्तता को गंभीर मानते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर तिरहुत क्षेत्र के डीआईजी ने दरोगा सुमन झा को 7 मार्च 2026 से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया.
वहीं, इसी वर्ष जनवरी में लालगंज थाना क्षेत्र में एक डकैती कांड के आरोपित के घर छापेमारी के दौरान बरामद करीब 10 किलो सोना-चांदी के आभूषण और लगभग 15 लाख रुपये नकद के गबन का मामला सामने आया था. इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष संतोष कुमार, अनुबंध चालक संतोष कुमार, सोनू कुमार, निजी चालक और चौकीदार कुंदन कुमार सहित दरोगा सुमन जी झा को भी आरोपित बनाया गया था.
