आजकल बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्क्रीन टाइम और तनाव की वजह से कई लोगों को आंखों और माथे में दर्द की शिकायत रहने लगी है. यह दर्द कभी हल्का होता है तो कभी इतना तेज कि रोज़मर्रा का काम भी मुश्किल हो जाता है. कुछ लोगों को सुबह उठते ही दर्द महसूस होता है, तो कुछ को देर तक मोबाइल या लैपटॉप देखने के बाद. कई बार लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है. आंखों और माथे में होने वाला दर्द अलग-अलग बीमारियों से जुड़ा हो सकता है, जिसे समय पर पहचानना जरूरी है. आइए इस बारे में जानते हैं.
आंखों और माथे में दर्द रहना किस बीमारी का संकेत हैं?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि आंखों और माथे में दर्द का सबसे आम कारण साइनस की समस्या हो सकती है. साइनस में सूजन या इंफेक्शन होने पर माथे, नाक की जड़ और आंखों के आसपास भारीपन और दबाव जैसा दर्द महसूस होता है. माइग्रेन भी इसकी एक बड़ी वजह है, जिसमें सिर के एक हिस्से के साथ आंखों में तेज दर्द, मतली, उल्टी और तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है.
इसके अलावा आंखों की कमजोरी, चश्मे का गलत नंबर या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाला आई स्ट्रेन भी इस दर्द को बढ़ा देता है. कुछ मामलों में हाई ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन और ज्यादा तनाव के कारण भी आंखों और माथे में लगातार दर्द बना रह सकता है. नींद की कमी होने पर आंखों में जलन, भारीपन और सिरदर्द के साथ यह समस्या और गंभीर हो सकती है.
आंखों और माथे में दर्द कब ज्यादा होता है? किसके लिए खतरनाक?
यह दर्द अक्सर ज्यादा देर तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने के बाद बढ़ जाता है. सुबह के समय साइनस के मरीजों को ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है. तनाव, नींद पूरी न होना और तेज धूप में निकलना भी दर्द को बढ़ा सकता है. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से माइग्रेन या आंखों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
अगर दर्द के साथ धुंधला दिखना, उल्टी, तेज बुखार या आंखों में सूजन हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
कैसे करें बचाव
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो.
स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें.
सही नंबर का चश्मा लगाएं और समय-समय पर आंखों की जांच कराएं.
ठंड, धूल और प्रदूषण से बचाव करें, साइनस की समस्या हो तो विशेष सावधानी रखें.
पूरी नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाएं.
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