Iran Israel War India Response: ईरान-इजराइल युद्ध पर सरकार के स्टैंड को लेकर कांग्रेस हमलावर, पूछा- “विश्व गुरु के दावों का क्या हुआ?”

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ईरान और अमेरिका-इजराइल में जारी जंग के बीच कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान पर हमला हुआ था. ये हमला पीस नेगोसिएशन के बीच हुआ. ये एक अवैध युद्ध है लेकिन हमारे पीएम में इतना नैतिक बल नहीं था कि इसका खंडन करें. एक मार्च को खामेनेई की हत्या हुई लेकिन पीएम ने श्रद्धांजलि भी नहीं दी क्योंकि उन्हें गैंग्स ऑफ एपस्टीन से इसकी इजाजत नहीं मिली.

पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की बात करती है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने वक्तव्य और सोनिया गांधी ने अपने लेख में इसका जिक्र किया है. हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के साथ ‘अतिथि देवो भवः’ की बात करते हैं. नरेंद्र मोदी भी अक्सर इनका जिक्र करते हैं. मगर उनकी कार्यशैली और विदेश नीति में इन दोनों कथनों का तनिक भी अंश नहीं दिखाई देता.

प्रधानमंत्री के मौन में बहुत कुछ सुनाई दे रहा

उन्होंने कहा, एक और कथन है- ‘मौनं स्वीकृति लक्षणम्’ यानी मौन रहना स्वीकृति/सहमति का संकेत होता है. प्रधानमंत्री के मौन में भी बहुत कुछ सुनाई दे रहा है, जिसे सुनकर पूरा विश्व हैरान है. आज प्रधानमंत्री की आपराधिक चुप्पी पूरे देश और उसकी विरासत पर बदनुमा दाग की तरह उभरकर सामने आ रही है. इस दौरान उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए पीएम मोदी को विश्व चेला कहा.

युद्ध शुरू होने से पहले इजराइल क्यों गए?

खेड़ा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी कंप्रोमाइज्ड हैं. नरेंद्र मोदी एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस के दबाव में हैं. अभी जो कुछ दिन पहले हुआ, वो किसी की भी समझ के परे है. आखिर ये युद्ध शुरू होने के कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी इजराइल क्यों गए? उनके इजराइल से वापस लौटने के 48 घंटे के अंदर गैर कानूनी जंग अमेरिका-इजराइल ने ईरान के साथ छेड़ दी और एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या हो गई. नरेंद्र मोदी इस पूरे क्रम में कठपुतली बन गए. अमेरिका-इजराइल की अंदरखाने कुछ और तैयारी थी और नरेंद्र मोदी के दौरे से दिखाया कुछ और गया.