छिंदवाड़ा: 12 साल की एक मासूम लड़की जंगल के रास्ते से पैदल स्कूल जा रही थी. अचानक सामने 5 तेंदुए एक साथ आकर खड़े हो गए. आमतौर पर कोई भी ऐसा मंजर देखकर पसीने छोड़ देगा, लेकिन ये बहादुर बेटी बिना डरे 3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंची और अपने टीचर को सारी बात बताई. जानिए कौन है वह 12 साल की बेटी, जिसने निडरता का ऐसा परिचय दिया है. जिसके अब हर तरफ चर्चे हो रहे हैं.
सामने खड़े थे 5 खूंखार जानवर, 12 साल की लड़की ने नहीं हारी हिम्मत
सातवीं क्लास में पढ़ने वाली 12 साल की कपूरी भारती हर दिन की तरह 20 जनवरी को भी अपने गांव कुआंखूटी से कुआंबादला के स्कूल के लिए निकली थी. जंगल के रास्ते में करीब 1 किलोमीटर का सफर तय किया ही था कि सामने उसे 2 बड़े तेंदुओं के साथ 3 शावक दिखाई दिए. कपूरी भारती ने बताया कि कुछ देर के लिए वह बिना डरे चुपचाप खड़ी हो गई. करीब 30 से 40 मीटर की दूरी पर 5 तेंदुआ खड़े थे.
थोड़ी देर बाद तेंदुए जंगल के रास्ते वहां से निकल गए. छात्रा कपूरी ने स्कूल में पहुंचकर प्रधानपाठक कोमलप्रसाद कोरी को इसकी सूचना दी. छात्रा की सूझबूझ के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के स्टॉफ को एक गाय का शिकार मिला. जिसके बाद आसपास अलर्ट जारी कर मुनादी कराई गई. छात्रा की सूझबूझ से अन्य घटनाओं को रोका जा सका.
राज्यपाल ने किया सम्मानित
बेटी की हिम्मत को देखकर छिंदवाड़ा के वन विभाग ने कपूरी को बाल वन प्रहरी का नाम दिया. वहीं तामिया पहुंचे राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने बेटी की वीरता को सलाम करते हुए सम्मानित किया. वन विभाग के प्रेरक समाजसेवी नितिन दत्ता ने बताया कि “बेटी की वीरता और समझदारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब एक साथ 5 तेंदुआ उसे दिखे, तो वह घबराकर वापस अपने घर जा सकती थी, लेकिन उसने एक किलोमीटर वापस जाने की वजह 3 किलोमीटर का खतरनाक जंगल के रास्ते का सफर तय किया, ताकि इसकी सूचना वह स्कूल में दे सके और बड़ी घटनाओं को रोक सके. इसके बाद प्रधान पाठक ने ही सूचना वन विभाग को दी.”
हो सकती थी बड़ी घटना बेटी ने की मदद
कुआंबादला स्कूल के प्रधान पाठक कोमल प्रसाद कोरी ने बताया कि “अगर कपूरी भारती डरकर वापस लौट जाती, तो तेंदूआ किसी हिंसक वारदात को अंजाम दे सकते थे, क्योंकि इसके पहले भी तेंदुए ने कई किसानों के पशुओं पर हमला किया था, हो सकता है इससे कोई जनहानि भी हो सकती थी, लेकिन जैसे ही वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई. वन विभाग ने आसपास के गांव में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर दिया और तेंदुओं की सर्चिंग में जुट गए थे.”
