राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी दिये जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसे गुरुवार को अधिसूचित कर दिया. यह अधिनियम केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा की अन्य शर्तों का विनियमन करेगा.
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) सहित सभी सीएपीएफ अपने-अपने अधिनियमों द्वारा शासित होते हैं.
नये अधिनियम में प्रावधान
इन अधिनियमों के अंतर्गत नियम ‘ग्रुप-ए’ जनरल ड्यूटी अधिकारियों और सीएपीएफ के अन्य अधिकारियों एवं सदस्यों की भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े हैं. नये अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि सीएपीएफ में महानिरीक्षक के 50 प्रतिशत पद और अतिरिक्त महानिदेशक के न्यूनतम 67 फीसदी पद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे.
प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भर्ती
इसमें कहा गया है कि विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के पदों पर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भर्ती की जाएगी. यह अधिनियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले साल अक्टूबर में केंद्र की उस याचिका को खारिज किये जाने के बाद लाया गया, जिसमें 2025 के उसके फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया गया था.
कैडर समीक्षा करने का आदेश
साल 2005 में शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने छह महीने के भीतर कैडर समीक्षा करने का आदेश दिया था.
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