BJP विधायक हरीश खुराना के खिलाफ अब तक FIR नहीं, AAP ने केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने का समय मांगा

दिल्ली

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के आचार्य श्री भिक्षु अस्पताल में तैनात डॉक्टर से मारपीट मामले में भाजपा विधायक हरीश खुराना के ऊपर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है. अब इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर उन्होंने और बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने का समय मांगा है.

सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया है कि हरीश खुराना के खिलाफ डॉक्टरों से कथित मारपीट के मामले में 40 डॉक्टर लिखित तौर पर शिकायत कर चुके हैं इसके बावजूद एफआईआर दर्ज़ नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि आप विधायक पुलिस कमिश्नर से इस मामले में मिलना चाहते हैं. गुरुवार से ही समय मांग रहे हैं, मगर पुलिस कमिश्नर से बात नहीं हो पाई है.

एफआईआर दर्ज क्यों नहीं?

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस तरह से दिल्ली में गुरुवार को एक सरकारी अस्पताल के इंटर्न डॉक्टर के साथ भाजपा के विधायक हरीश खुराना और उनके समर्थकों ने गाली गलौज, बदतमीजी और मार-पिटाई की, यह बहुत शर्म की बात है. एक तरफ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हैं, उनके साथ अगर किसी ने हमले की कोशिश की तो पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया और पांच दिन की रिमांड पर लिया. उसके ऊपर हत्या का प्रयास (अटेम्प्ट टू मर्डर) का मुकदमा दर्ज कर दिया. दूसरी तरफ, उसी दिल्ली में सरकारी डॉक्टर के साथ भाजपा के विधायक हरीश खुराना ने मारपीट की, मगर आज तक उस पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.

उधर, बुराड़ी से आप विधायक संजीव झा ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि 21 अगस्त को दिल्ली स्थित आचार्य भिक्षु हॉस्पिटल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों के साथ एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर घटना घटी. इस घटना में मोती नगर क्षेत्र के विधायक हरीश खुराना द्वारा अस्पताल परिसर में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों के साथ बदतमीजी एवं मारपीट की गई.

डॉक्टरों में भारी आक्रोश

संजीव झा ने कहा है कि इस घटना से अस्पताल के डॉक्टरों में भारी आक्रोश व्याप्त है. उन्होंने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, एफआईआर की मांग की है और अपनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. डॉक्टर समाज का वह वर्ग है, जो निरंतर रोगियों की सेवा एवं जनहित में कार्यरत रहता है. उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल शर्मनाक है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी प्रसारित करता है.

संजीव झा ने कहा कि यहां चिंताजनक तथ्य यह है कि इस बार यह घटना किसी सामान्य व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि द्वारा की गई है. यदि निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं इस प्रकार का आचरण करेंगे तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए और भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. विभिन्न डॉक्टर एसोसिएशनों ने भी इस घटना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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