ACB Trap: बीईओ दफ्तर का क्लर्क रिश्वत लेते गिरफ्तार, पेंशन चालू करने के नाम पर मांगे थे पैसे; एसीबी का बड़ा एक्शन

छत्तीसगढ़

कोंडागांव : ACB की टीम ने बीईओ दफ्तर के रिश्वतखोर बाबू को बेनकाब किया है. ये पूरा मामला राणापाल विकासखंड के बीईओ दफ्तर का है. मिडिल स्कूल सरपंच पारा राणापाल में तैनात सोनसिंह यादव 31 दिसंबर को रिटायर हुए. इसके बाद वो अपने पेंशन प्रकरण को लेकर बीईओ दफ्तर पहुंचे.लेकिन उन्हें पेंशन के बदले दफ्तर के चक्कर कटवाए जा रहे थे.

पेंशन चालू कराने के लिए मांगे 40 हजार

सोनसिंह ने आरोप गया कि कार्यालय का क्लर्क बाबू सतीश सोढ़ी ने पेंशन प्रकरण तैयार कर पेंशन चालू कराने के एवज में उनसे 40 हजार रुपए की अवैध मांग की थी. लगातार की जा रही इस मांग से सोनसिंह यादव मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे थे. मजबूरी और दबाव की स्थिति में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) जगदलपुर में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत की पुष्टि के बाद ACB ने योजनाबद्ध तरीके से छापामार कार्रवाई की.

एसीबी की टीम ने किया ट्रैप

कार्रवाई के दौरान जैसे ही सतीश सोढ़ी ने पेंशन प्रकरण के बदले 40 हजार रुपए स्वीकार किए, ACB की टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई है. आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

प्रार्थी सोनसिंह यादव ने शिकायत की थी.शिकायत की जांच करने पर प्रकरण सही पाया गया.इसके बाद एसीबी की टीम ने संबंधित क्लर्क को पैसे लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है- रमेश मरकाम, उप पुलिस अधीक्षक ACB

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी इसी BEO कार्यालय में ACB दो बार कार्रवाई कर चुकी है. पूर्व में क्लर्क पंचम लाल देवांगन और जयंती देवांगन पर भी रिश्वतखोरी के आरोप में ACB ने छापेमार कार्रवाई की थी. इसके बावजूद कार्यालय में भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही है.

शिक्षा विभाग में लगातार आ रही शिकायतें

लगातार सामने आ रहे मामलों से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पेंशन जैसे संवेदनशील और जरूरी मामलों में रिश्वत की मांग से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अब देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो.

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