इराक: दशकों बाद पहली बार देश में होगी जनगणना, दो दिन का लगेगा कर्फ्यू

विदेश

इराक 27 सालों में पहली बार जनगणना होने जा रही है. इसके लिए अगले महीने नवंबर में दो दिवसीय कर्फ्यू लगाया जाएगा. रविवार 1 सितंबर को अधिकारियों ने इसकी घोषणा की. प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी ने एक बयान में कहा कि जनसंख्या जनगणना करने के लिए इराक के सभी प्रांतों में 20 और 21 नवंबर को कर्फ्यू लगाया जाएगा. उन्होंने कहा कि दशकों के संघर्ष और हिंसा से तबाह इराक ने कई बार जनगणना स्थगित की है.

प्रधानमंत्री सुदानी ने कहा कि साल 2010 में विवादित क्षेत्रों पर समुदायों के बीच तनाव के कारण जनगणना को स्थगित किया गया था. इराक में आखिरी आम जनगणना 1997 में स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र बनाने वाले तीन उत्तरी प्रांतों को छोड़कर 15 इराकी प्रांतों में हुई थी. इराक में 1987 के बाद पहली बार साल 2010 में जनगणना होने जा रही थी, लेकिन जमीन विवाद के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था. ताकि उत्तर में तेल समृद्ध भूमि के एक हिस्से को लेकर अरबों और कुर्दों के बीच संघर्ष को रोका जा सके.

करीब 43 मिलियन जनसंख्या

मौजूदा समय में अनुमान के मुताबिक इराक की जनसंख्या करीब 43 मिलियन है. आगामी आगामी जनगणना के लिए अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के साथ भागीदारी की है. एजेंसी के अनुसार इससे पहले इराक में हर 10 साल में जनगणना होती थी, हालांकि देश सांप्रदायिक हिंसा की वजह से 2007 में जनगणना नहीं हो सकी.

55% शिया और 40% सुन्नी

एजेंसी का कहना है कि ये पहल इराक को सटीक जनसंख्या की जानकारी से लैस करने, प्रभावी नीति निर्माण की सुविधा प्रदान करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. अनुमान के मुताबित इराक की मुस्लिम आबादी का लगभग 55% हिस्सा शिया है, जबकि 40% सुन्नी हैं. इसके अलावा इराक की आबादी में ईसाई, यजीदी, मांडेयन और यार्सन भी शामिल हैं.

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