Sukma Encounter: सुकमा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, माओवादियों का सेक्शन कमांडर ढेर

छत्तीसगढ़

सुकमा: चार दशकों से बस्तर में काबिज नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की थी. उसका बस्तर में चलाए जा रहे नक्सल ऑपरेशन में असर दिखाई दिया. नक्सलियों के टॉप कमांडर बसवा राजू और हिड़मा समेत कई नक्सली मारे गए. कई बड़े नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. इस बीच सुकमा में 29 मार्च को नक्सल एनकाउंटर हुआ है. इस नक्सल मुठभेड़ में नक्सल कमांडर मुचाकी कैलाश मारा गया है.

सुकमा के पोलमपल्ली में हुआ एनकाउंटर

नक्सल फ्री इंडिया के डेडलाइन में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं. उससे पहले 29 मार्च को सुकमा के पोलमपल्ली में एक बड़ा नक्सल एनकाउंटर हुआ. इस अभियान की जानकारी सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने दी है. उन्होंने मीडिया को बताया कि माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना पर जिला रिजर्व गार्ड (DRG) की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. यह ऑपरेशन केवल एक नियमित कार्रवाई नहीं थी, बल्कि उस अंतिम लड़ाई का हिस्सा था, जो वर्षों से बस्तर की धरती को हिंसा से मुक्त करने के लिए लड़ी जा रही है.

मुठभेड़ में नक्सलियों का सेक्शन कमांड ढेर

मूचाकी कैलाश एक ऐसा नाम, जो कई बड़ी घटनाओं से जुड़ा रहा. नागरिकों की हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले और IED ब्लास्ट की साजिशों में उसकी भूमिका रही- किरण चव्हाण, एसपी, सुकमा

बस्तर आईजी ने नक्सल एनकाउंटर की जानकारी दी

यह मुठभेड़ सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उस सोच पर वार है, जिसने वर्षों तक बस्तर को खून और डर के साये में रखा. अब वही बस्तर बदल रहा है जहां बंदूक की जगह विकास की बातें हो रही हैं, और डर की जगह उम्मीद जन्म ले रही है. बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पट्टलिंगम ने इस घटना के बाद एक अहम संदेश दिया. उन्होंने साफ कहा कि माओवादी कैडरों के पास अब आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर अपने अंतिम चरण में है. यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि एक मौका है जिंदगी को दोबारा शुरू करने का.

नक्सलियों से सरेंडर की अपील

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने नक्सलियों से सरेंडर की अपील की है. उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ें, समाज की मुख्यधारा में लौटें और एक सुरक्षित, सम्मानजनक जीवन अपनाएं. क्योंकि अब समय बहुत कम बचा है या तो बदलाव को अपनाइए, या फिर इस बदलते दौर में खुद को पीछे छोड़ दीजिए.

नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले सुकमा में अब माओवादियों का सफाया हो रहा है. सुकमा की पहचान बदल रही है. यहां अब सड़कों का जाल बिछ रहा है, स्कूल खुल रहे हैं, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सबसे बड़ी बात लोगों के दिलों में डर की जगह भरोसा लौट रहा है.

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