खामनेई की हत्या पर भड़की कांग्रेस: ‘बाहरी शक्ति को सत्ता बदलने का अधिकार नहीं’, खरगे का कड़ा रुख

देश

कांग्रेस ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए रविवार को कहा कि किसी भी बाहरी शक्ति को सत्ता परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं है. कांग्रेस ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां साम्राज्यवाद के समान हैं और वे नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उनकी पार्टी दोहराती है कि प्रत्येक देश के नागरिकों को अपना राजनीतिक भविष्य तय करने का अधिकार है.

मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस युद्ध की औपचारिक रूप से घोषणा किए बिना एक सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई की लक्षित हत्या किए जाने की स्पष्ट रूप से निंदा करती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस गहरे शोक की घड़ी में सर्वोच्च नेता के परिवार, ईरान के लोगों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है.

शांतिपूर्ण समाधान की प्रतिबद्धता

खरगे ने कहा कि हम इस गंभीर संकट में उनके साथ एकजुटता से खड़े हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति संवाद के जरिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के साथ विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की प्रतिबद्धता पर आधारित है, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 में निर्देशित है.

जयराम रमेश ने विदेश नीति पर बोला तीखा हमला

वहीं पश्चिम एशिया में तनाव के मद्देनजर कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला किया. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के सार और तरीकों दोनों के लिए भारी कीमत चुका रहा है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कई ऐसे मुद्दों का हवाला दिया, जिनके बारे में उनका दावा था कि वे केंद्र सरकार की कमजोर विदेश नीति को दर्शाते हैं. उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री और उनके करीबी लोग चाहे जितना भी दिखावा करने की कोशिश करें, सच्चाई यह है कि स्वयंभू विश्व गुरु के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है.

ट्रंप ने पाकिस्तान को किया समर्थन

उन्होंने लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपनी नजदीकियां लगातार बनाए हुए हैं और बार-बार उसी व्यक्ति की सराहना कर रहे हैं, जिसके भड़काऊ बयानों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी. अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई में साफ़ तौर पर पाकिस्तान को समर्थन किया है.

राष्ट्रपति ट्रंप के दावों पर प्रधानमंत्री मौन

अमेरिकी राष्ट्रपति अब तक की गिनती के अनुसार 100 से अधिक बार यह दावा कर चुके हैं कि कि उन्होंने 10 मई 2025 को भारत के निर्यात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने में हस्तक्षेप किया था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के इन दावों पर प्रधानमंत्री पूरी तरह मौन हैं. ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा 10 मई 2025 को शाम 5:37 बजे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने की थी.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा किया कि पीएम मोदी के अनुरोध पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है और तुरंत प्रभाव से लागू हो रहा है. यह स्पष्ट है कि यह पीएम मोदी की एक हताश पहल थी. 18 दिन बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप की वह टैरिफ रणनीति, जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बुनियाद थी, अवैध और असंवैधानिक है. यह निर्णय व्यापक रूप से अपेक्षित था, लेकिन पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव डाला कि वे सबसे पहले इसकी घोषणा करें.

रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई

जयराम रमेश ने कहा कि यह व्यापार समझौता अब व्यापक रूप से एकतरफा माना जा रहा है, जिसमें भारत ने विशेष रूप से कृषि उत्पादों के आयात को उल्लेखनीय रूप से उदार बनाने के ठोस वादे किए हैं, जबकि इसके बदले में अमेरिका की ओर से भारत से आयात बढ़ाने का कोई समान वचन नहीं दिया गया है. अमेरिका ने बार-बार यह भी जोर देकर कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन इस संबंध में किए गए वादे पर मोदी सरकार ने कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया है.

ईरान पर अमेरिका-इजराइल का सैन्य हमला

कांग्रेस नेता ने कहा कि पीएम मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इजराइल का दौरा ऐसे समय में किया, जब पूरी दुनिया को यह जानकारी थी कि शासन परिवर्तन के उद्देश्य से ईरान पर अमेरिका-इज़राइल का सैन्य हमला आसन्न है. पीएम मोदी के इजराइल से रवाना होने के केवल दो दिन बाद ही यह हमला शुरू हो गया. वहां नेसेट में दिया गया उनका भाषण नैतिक कायरता का शर्मनाक प्रदर्शन था. ईरान पर थोपे गए इस युद्ध के प्रति मोदी सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों, चिंताओं और हितों के साथ विश्वासघात है.

सार्वजनिक रूप से चीन को दी क्लीन चिट

पीएम मोदी ने 19 जून 2020 को सार्वजनिक रूप से चीन को क्लीन चिट दे दी थी. यह चौंकाने वाला बयान उस समय आया, जब लद्दाख सीमा पर हमारे बीस बहादुर जवान शहीद हुए थे. इस क्लीन चिट ने हमारी बातचीत की स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया और अब हमें चीन की शर्तों पर संबंधों को सामान्य बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. देश को प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की विषयवस्तु और उसके तौर-तरीकों-दोनों की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.

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