Calcutta High Court Decision: कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश: बीमारी के अलावा नहीं मिलेगी छुट्टी, जजों की लीव रद्द करने की जानें वजह

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सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में तार्किक विसंगतियों का काम न्यायपालिका की देखरेख में करने का निर्देश दिया है. इसके मद्देनजर कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य के सभी जजों की छुट्टी कैंसिल कर दी है. हाई कोर्ट ने एक नोटिफिकेशन में कहा है कि बीमारी के अलावा कोई भी जज छुट्टी नहीं ले सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने SIR के आखिरी स्टेज में काम के एक बड़े हिस्से की जिम्मेदारी न्यायपालिका को दी है. इसके बाद हाई कोर्ट ने जजों की छुट्टी कैंसिल करने के निर्देश जारी किए हैं.

यह निर्देश इसलिए जारी किया गया है, ताकि SIR के काम के लिए निचली अदालतों का काम आसानी से चलता रहे. हाई कोर्ट ने हर डिस्ट्रिक्ट जज, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को बुलाकर एक कमेटी बनाने का आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने 250 जजों की लिस्ट जारी की

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 250 जजों की लिस्ट जारी की है. इलेक्शन कमीशन ने हर विधानसभा से एक ज्यूडिशियल ऑफिसर मांगा है. फिलहाल, हाई कोर्ट रजिस्ट्रार ने 250 ज्यूडिशियल ऑफिसरों की लिस्ट कमीशन को भेज दी है.

इस लिस्ट में NDPS और POCSO कोर्ट के 100 जजों के अलावा दूसरे मामलों के 150 जजों के नाम हैं. दूसरी ओर, चुनाव के दौरान केंद्रीय बल की तैनाती पर सोमवार को एक बैठक होगी. इस बैठक में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी, विशेष पर्यवेक्षक एनके मिश्रा, पुलिस के डीजी और सेंट्रल फोर्स के नोडल ऑफिसर शामिल होंगे.

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

बता दें कि SIR मामले पर सुनवाई के दौरान के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “यह खास हालात के लिए खास ऑर्डर है.” उन्होंने कहा था कि डिस्ट्रिक्ट जज या एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज को ‘ज्यूडिशियल ऑफिसर’ अपॉइंट किया जाना चाहिए.

चीफ जस्टिस ने कहा, “न्यायिक अधिकारी सभी मामलों को देखेंगे. हम सरकारी अधिकारियों को ज्यूडिशियल ऑफिसर के काम में कोऑपरेट नहीं करने देंगे.

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