Deportation Data: विदेश में अवैध तरीके से रह रहे भारतीयों पर शिकंजा, 5 साल में 1.6 लाख से ज्यादा निर्वासित; संसद में सरकार का जवाब

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विदेशों में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों पर लगातार शिकंजा कस रहा है. इसी का परिणाम है कि वापसी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. लोकसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, खासकर अमेरिका समेत कई देशों से भारतीय नागरिकों के निर्वासन के मामलों में पिछले तीन वर्षों में तेज उछाल देखा गया है. सरकार ने इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन से मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है.

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि अधिकांश देश अवैध रूप से रह रहे भारतीयों का पूरा डेटा साझा नहीं करते, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट है कि निर्वासन के मामलों में तेजी आई है. अमेरिका से वर्ष 2023 में 617 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया था, जो 2024 में बढ़कर 1,368 हो गया. वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,414 तक पहुंच गई, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी अधिक हैं.

सऊदी अरब से भारतीयों का लगातार निर्वासन

मध्य-पूर्व के देशों से भी बड़ी संख्या में भारतीयों को वापस भेजा गया है. सऊदी अरब से 2023 में 37 हजार से अधिक भारतीयों का निर्वासन हुआ था, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर करीब 14 हजार और 2025 में लगभग 13 हजार रही. वहीं संयुक्त अरब अमीरात से निर्वासन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई. यूएई से 2023 में करीब 3,500 भारतीयों को वापस भेजा गया था, जो 2024 में बढ़कर 6 हजार से ज्यादा और 2025 में लगभग 9,500 तक पहुंच गया.

जानें किन कारणों से वापस भेजे जा रहे भारतीय नागरिक

सरकार के मुताबिक भारतीय नागरिकों के निर्वासन के प्रमुख कारणों में बिना वैध वीजा विदेश जाना, वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी वहां रहना, बिना वर्क परमिट काम करना और श्रम कानूनों का उल्लंघन शामिल हैं. कई मामलों में भारतीय नागरिक नियोक्ताओं को छोड़कर भाग जाते हैं या कानूनी मामलों में भी फंस जाते हैं. निर्वासन के दौरान भारतीय नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर भी सरकार सतर्क नजर आ रही है.

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को हथकड़ी लगाए जाने को लेकर चिंता जताई है. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं, जैसे पगड़ी पहनने और भोजन संबंधी जरूरतों को लेकर भी मुद्दा उठाया गया है.

नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकार का कहना है कि 5 फरवरी 2025 के बाद निर्वासन उड़ानों में किसी दुर्व्यवहार की शिकायत सामने नहीं आई है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है और अवैध प्रवासन और मानव तस्करी से जुड़े मामलों पर अमेरिका समेत कई देशों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है. बढ़ते निर्वासन के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि विदेशों में अवैध तरीके से जाने की प्रवृत्ति अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिस पर सरकार और एजेंसियां निगरानी बढ़ा रही हैं.

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