ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले लोग सतर्क हो जाएं. ज्यादा मुनाफे का लालच दिखाकर साइबर अपराधी लोगों की जीवनभर की कमाई चंद मिनटों में साफ कर रहे हैं. झारखंड के लातेहार से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया.
जानकारी के अनुसार, झारखंड के लातेहार जिले के एक कारोबारी को शातिर साइबर अपराधियों ने निशाना बनाया. ठगों ने पहले पीड़ित को DIGITAL ASSETS नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा, जहां निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े आकर्षक ऑफर और भारी मुनाफे के दावे दिखाए जा रहे थे. ग्रुप में नकली ट्रेडिंग डेटा और फर्जी लाभ दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीता गया. इसके बाद उसे GLOBIXVAULT नामक एक कथित निवेश और ट्रेडिंग ऐप से जोड़ा गया, जो असल में फर्जी प्लेटफॉर्म निकला.
2.07 करोड़ रुपये की ठगी
अपराधियों ने वित्तीय संस्थान के नाम का सहारा लेकर खुद को भरोसेमंद साबित किया और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए. जब तक पीड़ित को धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तब तक वह लगभग 2.07 करोड़ रुपये गंवा चुका था. पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए झारखंड अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अंतर्गत साइबर क्राइम थाना, रांची में शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
इस मामले में 16 दिसंबर 2025 को कांड संख्या 160/25 दर्ज किया गया, जिसके बाद CID की टीम ने जांच शुरू की. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ी और आखिरकार पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के घोला थाना क्षेत्र निवासी अभिषेक बेरा नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से एक लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड और पांच डेबिट कार्ड सहित कई संदिग्ध सामग्री बरामद की गई. जांच एजेंसियां अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं.
CID झारखंड ने आम लोगों को ऐसे साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सावधान रहने की सलाह दी है. व्हाट्सएप, टेलीग्राम या गूगल विज्ञापनों के जरिए मिलने वाले निवेश ऑफर के लिंक पर क्लिक करने से बचें. किसी अनजान बैंक खाते या UPI आईडी में निवेश के नाम पर पैसा जमा न करें. निवेश हमेशा सरकार द्वारा अधिकृत और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही करें तथा पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही कदम उठाएं. यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर नजदीकी थाना या साइबर सेल को सूचित करें.
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