वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा- ‘हटाए गए नाम सार्वजनिक करें और आपत्ति दर्ज करने का समय बढ़ाएं

देश

केरल में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बड़ा आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि राज्य में विशेष गहन संशोधन के बाद जारी वोटर लिस्ट ड्राफ्ट से हटाए गए लोगों के नाम सरकारी दफ्तरों और आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाए. कोर्ट ने चुनाव आयोग से नामों को हटाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाने पर विचार करने के लिए भी कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने देश के कई राज्यों में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे. वयस्क मताधिकार की अवधारणा में 3 अलग-अलग हिस्से हैं. रजिस्ट्रेशन के समय, जब तक ये 3 शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई भी वोटर के तौर पर रजिस्टर होने का हकदार नहीं होगा.

क्या ECI नागरिकता तय कर सकता है?

उन्होंने कहा कि अब संसद ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 से इसे और भी साफ कर दिया है. इस पर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि वोटर बनने के लिए नागरिक होना जरूरी है. सवाल यह है कि क्या ECI नागरिकता तय कर सकता है? सीजेआई ने कहा कि वो कह रहे हैं कि वो सिर्फ नागरिकों की पहचान कर रहे हैं.

इन सब चीजों से हमारा कोई लेना-देना नहीं

इस पर द्विवेदी ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता सिर्फ वोटर के तौर पर रजिस्टर होने की हद तक तय कर सकता है. किसी व्यक्ति को वोटर के तौर पर रजिस्टर करने के सीमित मकसद के लिए. हम आपको देश से बाहर नहीं भेज सकते या यह तय नहीं कर सकते कि आपके पास यहां रहने का वीज़ा है या नहीं. इन सब चीजों से हमारा कोई लेना-देना नहीं.

इसलिए आप नागरिकता तय नहीं करेंगे

इस पर सीजेआई ने कहा, अगर कोई व्यक्ति साफ तौर पर नागरिक नहीं है और चुनाव से पहले वह आपसे आवेदन करता है, मैं वोट डालने के लिए नागरिक बनना चाहता हूं तो आप अथॉरिटी नहीं होंगे. इसलिए आप नागरिकता तय नहीं करेंगे. आप यह पता लगाने के लिए जांच करेंगे कि वह नागरिक है या नहीं. अगर कोई व्यक्ति कहता है कि मैं नागरिक हूं तो आपके पास यह जांच करने का अधिकार है कि वह असली नागरिक है या नहीं. आप यही कहना चाह रहे हैं.

2003 के बाद की वोटर लिस्ट खत्म कर रहे

इस पर द्विवेदी ने जवाब दिया, हम कह रहे हैं कि अगर आपके माता-पिता 2003 से पहले के हैं तो हम स्वीकार करते हैं. 1985-86 में जन्मे जो 2003 में वोट देने के योग्य थे, वो सभी एसआईआर में हैं. हम उन लोगों की बात कर रहे हैं जो 2005 में 18 साल के हो रहे हैं. इस पर जस्टिस बागची ने कहा, हम यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि जब आप कह रहे हैं कि कोई व्यक्ति 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है. आप 2003 के बाद की वोटर लिस्ट को खत्म कर रहे हैं. याचिकाकर्ता का तर्क है कि अगर मेरा नाम वोटर लिस्ट में है तो यह माना जाएगा कि मैं नागरिक हूं.

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