एकोदिष्ट श्राद्ध: जब केवल ‘एक’ पितर के लिए किया जाता है तर्पण; जानें इसका महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त

धार्मिक

हिंदू धर्म में हर महीना बड़ा विशेष माना जाता है, लेकिन माघ के महीने का खास महत्व हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है. ये माह मां गंगा को समर्पित किया गया है. माघ के महीने में तीर्थों के राजा प्रयाग में श्रद्धालु गंगा नदी के किनारे कल्पवास करते हैं. इस माह में रोजाना गंगा स्नान किया जाता है. इसके बाद मां गंगा और भगवान शिव का भक्ति भाव से पूजन किया जाता है. इस माह में एकोदिष्ट श्राद्ध भी किया जाता है. आइए जानते हैं कि ये क्या होता है? साथ ही जानते है इसकी तारीख और शुभ मुहूर्त.

एकोदिष्ट श्राद्ध क्या होता है? (Ekodista Shraddha Kya Hota Hai)

धर्म पंडितों के अनुसार, एकोदिष्ट श्राद्ध पितरों को समर्पित किया गया है. यह श्राद्ध मृत पिता और पितामह के लिए किया जाता है. विशेष पुरुष की पुण्यतिथि पर भी ये श्राद्ध किया जाता है. हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भीष्म पितामह का श्राद्ध किया जाता है. बताया जाता है कि सूर्य के उत्तरायण होने पर इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागी थी.

पांडवों ने किया था भीष्म पितामह का श्राद्ध

इस कारण हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भीष्म अष्टमी भी मनाई जाती है. शास्त्रों में बताया गया है कि भीष्म पितामह का श्राद्ध और तर्पण सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है. द्वापर युग में भीष्म पितामह के पंच तत्व में विलीन होने के बाद उनका श्राद्ध पांडवों द्वारा किया गया था.

एकोदिष्ट श्राद्ध डेट और शुभ मुहूर्त (Ekodista Shraddha Shubh Muhurat)

पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी को देर रात 11 बजकर 10 मिनट पर हो जाएगी. 26 जनवरी को रात 09 बजकर 17 मिनट पर इस अष्टमी तिथि का समापन होगा. उदया तिथि से 26 जनवरी को भीष्म अष्टमी मनाई जाएगी. इस दिन एकोदिष्ट श्राद्ध का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ मुहूर्त 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.

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