जेल से सीधे पर्चा भरने पहुंचा ‘कातिल दादा’! चेहरे पर कपड़ा लपेटे नामांकन करने आया पोते का हत्यारा

देश

स्थानीय बदमाश बंदू अंडेकर पोते की हत्या के आरोप में जेल में बंद है. उसे नगरपालिका चुनाव के लिए कोर्ट से नामांकन पत्र दाखिल करने की इजाजत मिलने के बाद पुणे के एक सरकारी दफ्तर ले जाया गया. वहां उसका चेहरा कपड़े ढंका हुआ था और दोनों हाथ रस्सी से बंधे हुए थे.पुणे की विशेष मकोका अदालत ने पोते आयुष कोमकर की हत्या से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद अंडेकर को चुनाव के लिए पर्चा दाखिल करने की सशर्त अनुमति थी, जिसके बाद इस प्रक्रिया के लिए उसे ले जाया गया.

बंदू अंडेकर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल किया है. इसके साथ ही बंदू अंडेकर की भाभी लक्ष्मी और बहू सोनाली ने भी अपने-अपने नामांकन दाखिल किए. ये दोनों भी आयुष की हत्या से जुड़े मामले में आरोपी हैं. पुणे और महाराष्ट्र की 28 अन्य नगरपालिकाओं के चुनाव के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है.

निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दाखिल किया नामांकन

बंदू अंडेकर का चेहरा काले कपड़े से ढका हुआ था और हाथ रस्सी से बंधे हुए थे. उसे नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए येरवडा केंद्रीय कारागार से पुलिस वैन के जरिये शहर के भवानी पेठ इलाके स्थित निर्धारित केंद्र पर लाया गया. केंद्र के अंदर ले जाते समय बंदू अंडेकर ने अपने समर्थन में नारे भी लगाए.

5 सितंबर को हुई थी आयुष की हत्या

बंदू अंडेकर के वकील मिथुन चौहान ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि अंडेकर और उसकी दो महिला रिश्तेदारों ने पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) के भवानी पेठ वार्ड कार्यालय में निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल किए.

आयुष की पांच सितंबर को नाना पेठ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह गणेश कोमकर का बेटा था, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पूर्व पार्षद और बंदू अंडेकर के बेटे वनराज अंडेकर की हत्या के मामले में आरोपी है.

नाना पेठ के रहने वाले बंदू उर्फ ​​सूर्यकांत रानोजी आंदेकर (70), लक्ष्मी उदयकांत आंदेकर (60), सोनाली वनराज आंदेकर (36) और 15 अन्य लोग हत्या में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं.

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