म्यांमार की पूर्व नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है. उनके बेटे किम एरिस ने कहा है कि उन्हें कई सालों से अपनी मां की कोई सीधी खबर नहीं मिली है. एरिस ने कहा, ‘पिछले दो साल से किसी ने उन्हें देखा तक नहीं है. न परिवार, न वकील. ऐसे में मुझे यह भी नहीं पता कि वह अभी जिंदा हैं या नहीं.’
किम एरिस ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि 80 साल की सू 2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से हिरासत में हैं. तब से उन्हें न तो परिवार से मिलने दिया गया है और न ही अपने वकीलों से संपर्क करने की अनुमति मिली. एरिस के मुताबिक, उन्हें सिर्फ कुछ लोगों के जरिए मिली सीमित जानकारी से पता चला है कि उनकी मां को दिल, हड्डियों और मसूड़ों से जुड़ी बीमारियां हैं.
म्यांमार में चुनाव होने वाले हैं
म्यांमार की सैन्य सरकार 2021 के तख्तापलट के बाद पहली बार चुनाव कराने जा रही है. ये चुनाव 28 दिसंबर से चरणबद्ध तरीके से होने वाले हैं. हालांकि, कई विदेशी सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन चुनावों को दिखावा बताया है. उनका कहना है कि इनका मकसद सैन्य शासन को वैध ठहराना है. किम एरिस भी इन चुनावों को न तो स्वतंत्र मानते हैं और न ही निष्पक्ष. इसके बावजूद वह इन्हें एक मौका मानते हैं, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर अपनी मां की रिहाई की मांग उठाई जा सकती है.
किम एरिस हाल ही में जापान पहुंचे थे, जहां उन्होंने वहां के नेताओं और सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने उनसे अपील की कि म्यांमार की सैन्य सरकार पर दबाव बनाया जाए और इन चुनावों को खारिज किया जाए. एरिस ने कहा, मेरी मां कभी नहीं चाहती थीं कि मुझे यह सब करना पड़े, लेकिन अब मेरे पास कोई और रास्ता नहीं है. आखिर मैं उनका बेटा हूं.
सू को लेकर किस बात का खतरा?
एरिस का मानना है कि म्यांमार के सैन्य शासक मिन आंग ह्लाइंग अपनी राजनीतिक जरूरतों के हिसाब से सू का इस्तेमाल कर सकते हैं. उनका कहना है कि अगर सैन्य सरकार चुनाव से पहले या बाद में सू को रिहा करती है या नजरबंद करती है, तो कम से कम उनकी स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है.
27 साल की सजा काट रहीं सू
एरिस के मुताबिक, सू को राजधानी नेपीडॉ में रखा गया है. उन्होंने बताया कि दो साल पहले मां की जो आखिरी चिट्ठी उन्हें मिली थी, उसमें सू ची ने अपनी कोठरी में गर्मी और सर्दी के दौरान अत्यधिक तापमान की शिकायत की थी. इस समय सू 27 साल की सजा काट रही हैं. उन पर भड़काने, भ्रष्टाचार और चुनावी धोखाधड़ी जैसे कई आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें वह लगातार खारिज करती रही हैं.
2021 के तख्तापलट के बाद से म्यांमार में भारी उथल-पुथल मची हुई है. देश के कई हिस्सों में सशस्त्र विद्रोह और हिंसा जारी है. इस हालात में एरिस को डर है कि दुनिया म्यांमार और सू की स्थिति को भूलती जा रही है. उन्होंने कहा कि रोहिंग्या संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी मां की छवि को नुकसान पहुंचा, जिससे उनकी आवाज पहले जैसी मजबूत नहीं रही.
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad