हिंदू धर्म व ज्योतिष में पूर्णिमा की तरह ही अमावस्या का भी एक विशेष स्थान है. कुछ क्षेत्रों में, खासकर उत्तर भारत में अमावस्या पर स्नान-ध्यान और शुभ कार्य किए जाते हैं. हालांकि, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बहुत से लोग अमावस्या से डरते हैं और उस दिन शुभ कार्य नहीं करते. अमावस्या इतनी डरावनी क्यों होती है? उस दिन क्या होता है? आइए अब इसके आध्यात्मिक महत्व पर एक नजर डालते हैं.
अमावस्या वह दिन है जब चंद्रमा पूरी तरह से दिखाई नहीं देता. चंद्रमा का पृथ्वी पर लगभग कोई प्रभाव नहीं पड़ता. तेलुगु संस्कृति में अमावस्या को अशुभ दिन मानने के कई कारण हैं. ज्योतिष के मुताबिक, अमावस्या के दिन चंद्रमा की ऊर्जा (शीतलता, शांति) बहुत कम होती है. चंद्रमा मन और भावनाओं को प्रभावित करता है. उसकी ऊर्जा में कमी के कारण मन और भावनाओं में अस्थिरता बढ़ सकती है.
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