बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में कुएं में गिरे हाथियों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया और उन्हें जंगल में छोड़ दिया गया.DFO गणवीर धमसील ने इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी दी.
देर रात उन्होंने बताया, ”4 नवम्बर की सुबह सुबह सूचना मिली कि चार हाथी हरदी ग्राम में एक खेत के कुएं में गिर गए हैं. हमारी टीम तत्काल मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. वहां काफी ज्यादा पानी था. धीरे धीरे समय बीतने और पानी कम होने पर पता चला कि 4 नहीं बल्कि 3 हाथी हैं, जिसमें एक हाथी का नन्हा बच्चा भी था. तीनों हाथियों को सुरक्षित निकालने में करीब तीन घंटे का समय लगा. सभी को सकुशल नजदीक के जंगल में छोड़ा गया, जहां वे अपने समूह से जा मिले.
डीएफओ ने बताया कि वन विभाग लगातार GPS और हर एक मूवमेंट्स को ट्रैक कर रही है. आसपास के ग्रामीणों को सूचनाएं पहुंचाने के लिए मुनियादी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जानकारी दे रहे हैं.
गणवीर धमसील ने कहा, ”यह अभियान हमारे फील्ड स्टाफ की सतर्कता और समर्पण का उदाहरण है. विभाग केवल वन्यजीवों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीवन की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. हमने रेस्क्यू के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया और किसी भी हाथी को चोट नहीं आई. विभाग भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए खुले कुओं की पहचान और सुरक्षा उपायों पर काम शुरू कर रहा है.”
भावनात्मक दृश्य: हाथियों के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब रैंप बनाकर कुएं से बाहर निकलने का रास्ता तैयार किया गया तो सबसे पहले शावक (बच्चा हाथी) ने बाहर निकलने की कोशिश की. कुएं में किनारे पर पहुंचते ही शावक की मां(हथिनी) चिंघाड़ते हुए उसकी मदद करने लगी. मां ने कुछ पल तक उसे सूंड से छुआ और फिर खुद भी रैंप के रास्ते बाहर आई.इस दृश्य ने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया.
ग्रामीणों ने कहा कि जानवर भी इंसानों की तरह अपने बच्चों के लिए चिंतित रहते हैं. मां हाथी तब तक नहीं निकली, जब तक उसका बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं आया. तीसरा हाथी (नर किशोर) अंत में बाहर आया और तीनों एक दूसरे के पास जाकर जंगल की दिशा में चले गए. यह दृश्य पशु-पक्षियों की संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण बन गया.
पूरी रात चलती रही तैयारी, सुबह 8 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन: यह घटना रात करीब 1 से 2 बजे की है. ग्रामीणों ने आवाजें सुनकर पहले तो समझा कि खेत में कोई झगड़ा हो रहा है, लेकिन जब तेज चिंघाड़ें और पानी के छींटे की आवाज आई तो तो उन्हें शक हुआ. जब टॉर्च लेकर देखा तो कुएं में हाथी फंसे मिले. ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी. बलौदाबाजार से अधिकारी दल रवाना हुआ. जेसीबी और रस्सियों की व्यवस्था की गई. सुबह 5 बजे से मौके पर तैयारी शुरू हो गई और लगभग सुबह 8 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ. करीब तीन घंटे की लगातार कोशिशों के बाद आखिरकार सभी हाथी बाहर निकाले गए.
विभागीय अधिकारियों ने रैंप (Ramp) बनाकर कुएं की एक दीवार को तोड़ा ताकि हाथी खुद अपनी ताकत से बाहर निकल सकें. इसी सावधानी के कारण किसी भी जानवर को चोट नहीं आई. यह पूरा ऑपरेशन DFO की निगरानी में हुआ.
मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) स्तोविषा समझदार भी पहुँचीं मौके पर: मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) स्तोविषा समझदार भी घटनास्थल पहुंचीं और पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया का निरीक्षण किया. उन्होंने मौके पर फील्ड स्टाफ की प्रशंसा करते हुए कहा, ”यह अभियान विभागीय समन्वय और सतर्कता का बेहतरीन उदाहरण है. रेस्क्यू के दौरान न सिर्फ हाथियों की सुरक्षा बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया.” उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह के खुले कुओं की सूची बनाई जाए और तत्काल सुरक्षा घेरा तैयार किया जाए.
बारनवापारा अभयारण्य के अधीक्षक SDO कृषानू चंद्राकर भी मौके पर मौजूद रहे. उन्होंने रेस्क्यू टीम का नेतृत्व किया. उन्होंने बताया, ”तीनों हाथी पूरी तरह स्वस्थ हैं. उन्हें जंगल में छोड़ने के बाद टीम ने कुछ घंटों तक निगरानी की. अब वे अपने समूह के साथ मिल चुके हैं.”
हरदी गांव के लोग शुरू में डरे हुए थे. पिछले महीने ही इसी इलाके में एक किसान कनकुराम ठाकुर की हाथी के हमले में मौत हो चुकी थी. इस कारण कई ग्रामीणों ने पहले सहयोग से इनकार किया. लेकिन जब विभाग ने भरोसा दिलाया कि किसी की फसल या संपत्ति को नुकसान नहीं होगा तो कुछ ग्रामीण आगे आए और मदद की.
बारनवापारा में लगातार बढ़ रही इंसान-हाथी मुठभेड़: बलौदाबाजार और महासमुंद के बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती गतिविधियां चिंता का कारण हैं. फिलहाल 28 हाथियों का झुंड बारनवापारा अभ्यारण इलाके में घूम रहा है. फसलें रौंदने और तोड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को चेतावनी सिस्टम, गश्त और मजबूत करना चाहिए.
DFO गणवीर धमसील ने बताया, ”हाथियों की आवाजाही प्राकृतिक है. हम लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. रात्रि गश्त और व्हाट्सएप अलर्ट ग्रुप बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीणों को तुरंत सूचना दी जाती है. आने वाले समय में तकनीकी सहायता से इस व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा. प्रत्येक परिक्षेत्र में प्रशिक्षित टीम और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.
