मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा- मुंबईकरों को बंधक बनाना गलत, संजय राउत ने अमित शाह पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में इस समय मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील मराठाओं को आरक्षण देने की मांग पर अड़े हुए हैं. इसी के चलते वो मुंबई के आजाद मैदान में शुक्रवार से भूख हड़ताल कर रहे हैं. इसी के बाद बीजेपी के मराठा नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनोज जरांगे के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा, आजाद मैदान पर आंदोलन की अनुमति दी गई है, लेकिन आम मुंबईकरों को बंधक बनाना गलत है.

फडणवीस की तुलना शिवाजी महाराज से किए जाने पर भी उन्होंने टिप्पणी की. उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छत्रपति शिवाजी महाराज के पदचिन्हों पर चलकर काम कर रहे हैं. हालांकि, हमने कभी भी महाराज की तुलना नहीं की, क्योंकि ऐसा करने से नया विवाद खड़ा हो सकता है.

आरक्षण की मांग को लेकर क्या कहा?

मराठा आरक्षण को लेकर उन्होंने कहा, कानूनी रूप से जिनके पास वैध प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें ओबीसी से आरक्षण मिलना संभव नहीं है. अगर दबाव में कुछ मांगें मान भी ली गईं, तो वो अदालत में टिक नहीं पाएंगी. साथ ही उन्होंने शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा, शरद पवार चार बार मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने तमिलनाडु की तर्ज पर आरक्षण क्यों नहीं दिया? उनका रवैया सिर्फ समय निकालने वाला रहा. तमिलनाडु का आरक्षण अभी भी सुप्रीम कोर्ट में है और टिकने वाला नहीं है.

साथ ही उन्होंने कहा, देवेंद्र फडणवीस सच्चाई जानते हुए भी अक्सर बोलने से बचते हैं, जबकि अजित पवार खुलकर अपनी बात रखते हैं. इसी वजह से शरद पवार के बयान पर अजित दादा ने प्रतिक्रिया दी. राज ठाकरे की टिप्पणी पर रिएक्शन देते हुए उन्होंने कहा, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस कभी झूठ नहीं बोलते, लेकिन कुछ लोग हमेशा झूठ बोलते हैं और उसे सच साबित करने की कोशिश करते हैं.

“राजनीति के लिए ही यह सब हो रहा है”

मराठा आरक्षण के आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा, यह आंदोलन आम मुंबईकरों को बंधक बनाने का काम कर रहा है. यह असल में राजनीतिक आरक्षण हासिल करने की जुगत है ताकि आगामी पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का राजनीतिक फायदा उठाया जा सके. लेकिन सिर्फ प्रमाणपत्र से काम नहीं चलेगा, जब तक उसकी वैधता साबित न हो. उन्होंने आगे कहा, मराठा समाज सामाजिक रूप से पिछड़ा नहीं है. उन्हें दलित समाज की तरह छुआछूत या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा.वास्तविक आरक्षण EWS के अंतर्गत ही है. पिछड़ा वर्ग घोषित करने का अधिकार सिर्फ पिछड़ा वर्ग आयोग को है, शिंदे समिति को नहीं.

उन्होंने आगे निशाना साधते हुए कहा, गांव के सरपंच पद और राजनीति के लिए ही यह सब हो रहा है. साथ ही चंद्रकांत पाटील ने सीधा हमला करते हुए कहा, मराठा आंदोलन के नाम पर राजनीति हो रही है, कानूनी तौर पर टिकने वाला कोई ठोस आधार नहीं.

संजय राउत ने अमित शाह पर साधा निशाना

वहीं, दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा, महाराष्ट्र के कोने-कोने से मराठा समाज के लोग मुंबई पहुंचे हैं. जरांगे पाटील आजाद मैदान पर बारिश में आंदोलन और अनशन पर बैठे हैं. हजारों की संख्या में मराठा समाज के आने से मुंबई का बड़ा हिस्सा ठप्प पड़ा है.

संजय राउत ने आगे कहा, देश के गृह मंत्री अमित शाह मुंबई आए लेकिन आंदोलनकारियों से नहीं मिले. हमारी अपेक्षा थी कि शाह आजाद मैदान जाकर आंदोलनकारियों का दुख-दर्द सुनेंगे और समाधान निकालेंगे. सवाल उठाते हुए संजय राउत ने कहा, जो गृह मंत्री कश्मीर से धारा 370 हटा सकते हैं, वो मराठा समाज को न्याय दिलाने के लिए कानून में बदलाव क्यों नहीं कर सकते? शाह ने सिर्फ इतना कहा कि मुंबई का महापौर बीजेपी का होना चाहिए यानी बाहरी होना चाहिए.

बीजेपी और शिंदे-फडणवीस पर हमला

साथ ही सीएम फडणवीस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, फडणवीस और अमित शाह की सरकार मराठी लोगों को खत्म करने पर तुली है. एक कहते हैं और दूसरा करते हैं.

उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों से आंदोलनकारियों को सुविधा, अन्न, पानी और आश्रय देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, हमें मराठा समाज के आंदोलनकारियों का स्वागत करना चाहिए, ये मराठी ताकत है. साथ ही उन्होंने कहा, उदयनराजे और शिवेंद्रराजे जरांगे पाटील के साथ मंडप में जाकर अनशन पर बैठते, लेकिन वो बीजेपी के दबाव में हैं. ये सब लोग बीजेपी के हस्तक हैं, यह महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है.

साथ ही उन्होंने एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा, उपमुख्यमंत्री दरेगांव जो उनका पैतृक गांव है वहां जाकर बैठ जाते हैं, लोगों को जवाब देने से बचते हैं. अमित शाह के पीछे घूमने का समय है, लेकिन आंदोलनकारियों से मिलने का नहीं. आंदोलन में हुई मौतों को लेकर उन्होंने कहा, आंदोलनकारियों की मौतें दिल्ली की सीमा पर किसानों की मौतों जैसी हैं. मोदी सरकार की तरह ही फडणवीस भी महाराष्ट्र में आंदोलनकारियों की बली ले रहे हैं.

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