नवांशहर : जिला मैजिस्ट्रेट अंकुरजीत सिंह ने शोर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाऊडस्पीकर और अन्य संगीत वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 के तहत और सुप्रीम कोर्ट व पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए लिया गया है।
जिला मैजिस्ट्रेट ने बताया कि मैरिज पैलेसों, होटलों और रैस्टोरेंट में तेज आवाज में डीजे और लाऊडस्पीकर के इस्तेमाल से आम जनता, मरीजों और छात्रों को काफी परेशानी होती है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। नए निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए लाऊडस्पीकर के इस्तेमाल से पहले संबंधित उपमंडल मैजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद भी ध्वनि स्तर 10 डेसिबल (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए। परीक्षाओं से 15 दिन पहले लाऊडस्पीकर के इस्तेमाल की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी।
सांस्कृतिक और धार्मिक अवसरों पर, साल में अधिकतम 15 दिनों के लिए रात 10 बजे से आधी रात तक लाऊडस्पीकर की अनुमति होगी, लेकिन तब भी ध्वनि स्तर 10 डेसिबल (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए। निजी ध्वनि प्रणालियों के लिए ध्वनि स्तर 5 डेसिबल (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए। शिकायत मिलने पर, उपमंडल मैजिस्ट्रेट, उप पुलिस कप्तान और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मिलकर जांच करेंगे। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों को जब्त कर लिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ये आदेश 20 सितम्बर 2025 तक लागू रहेंगे।
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