भगवान शिव की भक्ति और पूजा को बेलपत्र के बिना अधूरा ही माना जाता है. देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए उन पर चढ़ाए जाने वाली सामग्री में बेलपत्र का सर्वश्रेष्ठ स्थान है. मान्यता है की सावन में इसे शिव पर अर्पित करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
वैसे तो पूरे साल ही भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का होना अनिवार्य माना जाता है लेकिन सावन के महीने में इसे शिव को अर्पित करने का महत्व और महिमा का ही गुना बढ़ जाती है. बेलपत्र से आरोग्य और सौभाग्य दोनों के वृद्धि होती है. बेल के पत्र क कई आध्यात्मिक, धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व हैं तो चलिए जानते हैं बेलपत्र भगवान के शिव की पूजा के लिए इतना खास क्यों है.
शिव को इतना प्रिय क्यों है बेलपत्र ?
बेलपत्र से जुड़ी पौराणिक कथाएं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे दो कथाएं प्रचलित हैं. पहली मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट विष निकला तो भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया, जिस कारण से शिव का शरीर तपने लगा. विष के प्रभाव से शिव का कंठ जल रहा था तब देवताओं ने उनकी जलन को शांत करने के लिए बेलपत्र के साथ जल जल चढ़ाना शुरू कर दिया. जिससे शिव को शांति और ठंडक मिली, तभी से भगवान शंकर को बेलपत्र चढ़ाने की प्रथा चली आ रही है.
दूसरी मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने वर्षों तक जंगल में तपस्या की थी जहां बेल के पत्र चढ़ाकर ही भगवान शंकर को प्रसन्न किया था और शिव ने उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. तभी से शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है. भगवान शिव को यह अति प्रिय है.
बेलपत्र से जुड़ी अन्य मान्यताएं
- स्कंद पुराण के अनुसार बेल के पेड़ का जन्म माता पार्वती के स्वेद यानी की पसीने से हुआ था. बेलपत्र के पूरे ही पेड़ को पवित्र माना जाता है और इसमें देवी लक्ष्मी का वास भी बताया जाता है. यही कारण है कि भगवान शिव को इसे अर्पित करने पर सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
- शिव पुराण में भी बेलपत्र की महिमा का बखान किया गया है उसमें कहा गया है कि बेलपत्र के दर्शन, स्पर्श और शिव को अर्पण करने से सभी पापों का नाश हो जाता है और ऐसा व्यक्ति मोक्ष की प्राप्ति करता है.
- बेलपत्र में तीन देवताओं का स्वरुप माना जाता है. इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि इसे देवों के देव को समर्पित किया जाता है.
- बेलपत्र को भगवान के त्रिनेत्र से जोड़कर भी देखा जाता है.
- वहीं बेलपत्र को तीन गुणों से जोड़कर भी देखा जाता है. इसे तम, रज और सत का प्रतीक माना जाता है.
बेल पत्र के आयुर्वेदिक गुण
इन्हीं सब मान्यताओं के साथ इसके कई फायदे बताए जाते हैं. आयुर्वेदिक गुणों की बात करें तो इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. बेल के पत्ते शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं साथ ही बेल का फल भी गर्मी को शांत करने का काम करता है. यही कारण है कि जब कालकूट विष से शिव का शरीर जल रहा था तो बेलपत्र उन पर अर्पित किए गए थे. इन्हीं सब वजहों से शिव पर बेलपत्र चढ़ाने की प्रथा युगों से चली आ रही है और यह शिव को अति प्रिय माना जाता है.
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