चंडीगढ़ : शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ दायर याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में आज सुनवाई होगी।
मजीठिया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से की गई है, ताकि उन्हें बदनाम और परेशान किया जा सके क्योंकि वे सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं। यह याचिका वकील सरतेज सिंह नरूला, दमनबीर सिंह सोबती और अर्शदीप सिंह चीमा के ज़रिए दाखिल की गई थी।
विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी कानून की धाराओं के तहत 25 जून को मोहाली थाने में एफआईआर दर्ज की थी। मजीठिया का कहना है कि यह एफआईआर और उसी दिन की गई उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह गैरकानूनी थी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि उन्हें सुबह 9 बजे से 11:20 बजे तक दो घंटे से ज्यादा समय तक बिना किसी वैध प्रक्रिया के हिरासत में रखा गया। यह उनके मुताबिक भारतीय संविधान की धारा 22(2) और बीएनएस की धारा 187 का सीधा उल्लंघन है, जिसमें 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना ज़रूरी होता है।
हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मामले की सुनवाई एक दिन के लिए टाल दी थी ताकि मजीठिया के वकील नए रिमांड ऑर्डर को जस्टिस त्रिभुवन दहिया की बेंच के सामने पेश कर सकें। बुधवार को मजीठिया की रिमांड अवधि चार दिन और बढ़ा दी गई थी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि विजिलेंस ब्यूरो की रिमांड याचिका में कोई ठोस या तात्कालिक जांच के आधार नहीं दिए गए, बल्कि केवल मजीठिया के कथित प्रभाव, विदेशी संपर्क और दस्तावेजों या डिजिटल उपकरणों का सामना करवाने जैसे सामान्य बयानों पर भरोसा किया गया है।
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