सौ सुनार की एक लोहार की…सिर्फ कराची पोर्ट पर एक्शन से दिव्यांग हो जाएगा पाकिस्तान

विदेश

भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ता ही चला जा रहा है. इस बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है भारत की जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान के कराची पोर्ट तक पहुंच चुकी है. गुरुवार देर रात कराची शहर में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि यह हमला भारतीय नौसेना की तरफ से किया गया हो सकता है.

हालांकि, भारत सरकार या नौसेना की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन अगर वाकई कराची पोर्ट को निशाना बनाया गया है, तो यह पाकिस्तान के लिए केवल एक सैन्य हमला नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक रूप से पंगु बनाने वाला वार हो सकता है.

50 साल बाद पहली बार कराची को बनाया गया निशाना

बताया जा रहा है कि यह 1971 की जंग के बाद पहला मौका है जब भारतीय नौसेना ने कराची पोर्ट की तरफ सीधा मोर्चा खोला है. कराची पोर्ट पाकिस्तान का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बंदरगाह है. यहां हुए किसी भी तरह के हमले का असर सीधे तौर पर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर पड़ता है.

क्या है कराची पोर्ट और क्यों है यह अहम?

कराची पोर्ट, पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची में स्थित है. यह अरब सागर पर बना प्राकृतिक गहराई वाला बंदरगाह है. पाकिस्तान का लगभग 60 फीसदी व्यापार यहीं से होता है, इसलिए इसे देश की आर्थिक रीढ़ भी कहा जाता है. कराची पोर्ट न केवल एक व्यापारिक केंद्र है बल्कि पाकिस्तान की सैन्य रणनीति का भी अहम हिस्सा है. यहां से न केवल सामान का आयात-निर्यात होता है, बल्कि नौसेना की गतिविधियां भी चलती हैं. ऐसे में अगर इस बंदरगाह पर हमला होता है या इसकी गतिविधियां बाधित होती हैं, तो पाकिस्तान को दोहरे नुकसान का सामना करना पड़ सकता है एक तरफ व्यापार को झटका और दूसरी ओर सुरक्षा पर खतरा.

कराची पोर्ट की ताकत

करीब 11.5 किलोमीटर लंबे नेविगेशनल चैनल और 12.2 मीटर गहराई वाले इस पोर्ट पर हर साल करीब 1600 जहाज आते हैं/ इसमें 30 ड्राई कार्गो और 3 लिक्विड कार्गो की बर्थ हैं. यहां का कार्गो हैंडलिंग क्षमता सालाना 26 मिलियन टन है, जिसमें 14 मिलियन टन लिक्विड और 12 मिलियन टन ड्राई कार्गो शामिल है.

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