श्रीनगर : कश्मीर की साइबर पुलिस ने आज बड़ी सफलता हासिल करते हुए डिजिटल धोखाधड़ी का मामला सुलझाया है। पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे 4.13 लाख रुपये बरामद किए हैं। इन तीनों आरोपियों में से 2 पंजाब के पटियाला और एक यूपी का रहने वाला है।
मिली जानकारी के अनुसार साइबर पुलिस ने आज 21 लाख रुपये की डिजिटल धोखाधड़ी का मामला सुलझाते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए SSP श्रीनगर ने कहा कि यह घोटाला तब सामने आया जब श्रीनगर के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथ धोखाधड़ी करने वालों ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India) (ट्राई) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों का रूप धारण कर धोखाधड़ी की है।
SSP ने बताया कि, धोखेबाजों ने पीड़ित पर 6.8 करोड़ रुपये के फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल होने का आरोप लगाया। उसे डराने के लिए, उन्होंने फर्जी गिरफ्तारी वारंट और दंड जारी किए, बातचीत को “राष्ट्रीय रहस्य” घोषित किया और पीड़ित को अपने घर को बंद करने और दूसरों के साथ किसी भी तरह की बात न से बचने का निर्देश दिया। इस दबाव में, पीड़ित ने समय से पहले अपनी फिक्स डिपोजिट बंद कर दी और 21 लाख रुपये एक फर्जी HDFC Bank खाते में ट्रांसफर कर दिए, यह झूठा आश्वासन दिया कि कुछ ही घंटों में धनराशि वापस कर दी जाएगी।”
FIR संख्या 26/2024 के तहत मामवा दर्ज की गई और पुलिस ने उन्नत तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके एक विस्तृत जांच शुरू की। एसएसपी ने कहा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में टीमें भेजी गईं, जिसके बाद शामली (UP) से गौरव कुमार, पटियाला (Punjab) से गुरप्रीत सिंह और पटियाला से उज्ज्वल चौहान को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस ने 4 मोबाइल फोन, एक मैकबुक, 13 सिम कार्ड, 24 डेबिट कार्ड, 20 चेक बुक, 10 पासबुक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। शिकायतकर्ता के खाते में 4.13 लाख रुपये की राशि पहले ही वापस कर दी गई है। SSP श्रीनगर ने कहा कि अन्य साजिशकर्ताओं का पता लगाने और इस घोटाले के पीछे के बड़े नेटवर्क को खत्म करने के लिए आगे की जांच जारी है।
पुलिस ने नागरिकों से संवेदनशील वित्तीय जानकारी सांझा करते समय सावधानी बरतने का आग्रह करते हुए एक सार्वजनिक सलाह जारी की है और ऐसी योजनाओं का शिकार न होने की चेतावनी दी है। SSP ने कहा, वैध सरकारी एजेंसियां कभी भी भुगतान की मांग नहीं करेंगी, फोन कॉल पर जांच नहीं करेंगी या ऑनलाइन संवेदनशील डेटा का अनुरोध नहीं करेंगी। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि करें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।
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