शेरपुर: पराली को आग लगाने के कारण पैदा हुआ धुंआ और मौसम की तबदीली के कारण बनी स्मॉग ने हालात गत दिवस से भी ज्यादा खराब कर दिए। मंगलवार की रात को स्माॅग के कारण दिखना भी बंद हो गया था और बुधवार और आज वीरवार को भी स्माॅग के कारण लोगों को सूर्य देवता के दर्शन नहीं हुए। विजिबिलिटी कम होने के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हो रहा है और हादसों का खतरा कम हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को झेलनी पड़ रही है।
जहरीले धुएं के कारण लोगों को खांसी, जुखाम और बुखार जैसी बीमारियों ने जकड़ लिया है। बहुत से लोग मास्क लगाकर घर बाहर निकल रहे हैं। अगर एक दो दिनों में बारिश न हुई तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। मौसम विभाग अनुसार पश्चिमी गड़बड़ी के कारण नमी की मात्रा में वृद्धि हुई है। नतीजे स्वरूप सुबह घना कोहरा पड़ने लगा है। पराली और पटाखों के धुएं ने हालात खराब कर दिए। नमी और हवा की रफ्तार कम होने के कारण यह धुआं बिखरता नही, जिस कारण इसका गिलाफ बन जाता है जो सूर्य की रौशनी को धरती की सतह तक आने नहीं देता।
उधर हालात इतने खराब होने के बावजूद पराली जलाने की घटनाओं का सिलसिला नहीं रुक रहा। बुधवार को पराली जलाने के 509 ताजा मामलों ने पहले से ही प्रदूषित पर्यावरण को और जहरीला कर दिया। इसके साथ ही पराली जलाने के मामलों की संख्या 7621 तक पहुंच गई है। पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले फरीदकोट और फिरोजपुर में 91-91 मिले। मोगा में 88, मुक्तसर में 79, तरनतारन में 40, मानसा में 24, बरनाला में 16, फाजिल्का में 14, संगरूर में 7 और अमृतसर में 5 केस मिले।
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