चंडीगढ़: प्राइवेट स्कूल संघ ने प्रदेश सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हुए स्कूल बसों की आयु सीमा बढ़ाने या बस की वास्तविक स्थिति, फिटनेस और किलोमीटर के आधार पर संचालन की अनुमति देने की मांग की है। इसके साथ ही संघ ने स्कूल बसों का टैक्स माफ करने की भी पुरजोर मांग उठाई है। संघ का कहना है कि लगातार बढ़ रहे खर्चों और नियमों के चलते निजी स्कूलों पर आर्थिक बोझ असहनीय होता जा रहा है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने जानकारी देते हुए बताया कि एक 16 सीटर छोटी बस की कीमत करीब 18 लाख रुपए होती है, जो रजिस्ट्रेशन, 5 साल के लोन के ब्याज और बीमा (Insurance) को मिलाकर लगभग 26 लाख रुपए तक पड़ जाती है।
💰 बढ़ता मासिक खर्च और ग्रामीण-शहरी इलाकों का किराया
ऑपरेशनल खर्चों का जिक्र करते हुए संघ ने बताया कि लोन की किस्त, चालक-परिचालक का वेतन, रखरखाव और डीजल का खर्च मिलाकर कुल मासिक खर्च लगभग 80 हजार रुपए तक पहुँच जाता है।
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सीटिंग क्षमता और किराया: स्कूल बस में तय नियमों के अनुसार सीटों से डेढ़ गुना बच्चों को बैठाए जाने की व्यवस्था होने के बावजूद, ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में प्रति छात्र करीब 400 रुपए और शहरों में 800 रुपए तक ही मासिक किराया मिल पाता है।
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मांगें: महंगी बसें, भारी-भरकम ब्याज, बीमा और डीजल के लगातार बढ़ते दामों के कारण निजी स्कूलों के लिए बसों का संचालन करना बेहद कठिन हो गया है, जिसके चलते सरकार से राहत देने की गुहार लगाई गई है।
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