मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक ही परिवार की समग्र आईडी से मिशन ट्रस्ट के बाल भवन के 105 बच्चों का फर्जी पंजीयन पाया गया है। समग्र आईडी में हेराफेरी करके किए गए इस बड़े फर्जीवाड़े में मिशन ट्रस्ट से जुड़े संजीव लैबरर्ट को पुलिस ने धोखाधड़ी और मतांतरण के गंभीर आरोपों के तहत गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि बच्चों का मतांतरण कराने की मंशा से यह पूरा षड्यंत्र रचा गया था, हालांकि मामले में अभी पांच अन्य आरोपी फरार हैं जिनकी तलाश की जा रही है।
🔍 कलेक्टर के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय टीम ने की जांच, जैविक माता-पिता के नाम बदले
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के आदेश पर गठित चार सदस्यीय जांच टीम ने जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, तो समग्र आईडी में हेराफेरी के आरोप पूरी तरह सही पाए गए। इसके बाद देहात थाने में मामला दर्ज किया गया। देहात थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इन बच्चों के जैविक माता-पिता के स्थान पर हेरफेर करके उनके नाम एक ही परिवार के सदस्यों के रूप में दर्शाए गए थे। मुख्य आरोपी संजीव लैंबरर्ट ने वर्ष 2016 में एक बालक का नाम अपने घर की समग्र आईडी में दर्ज कराया था, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रह रहा है। पुलिस टीम सत्यता की पुष्टि के लिए बताए गए पते पर जाकर पूछताछ करेगी।
📋 बच्चों की पहचान में हेरफेर और ‘गोद लेने’ के नाम पर खेल
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि प्रवीण पाल की फैमिली आईडी में एक बच्चे का रिश्ता ‘गोद लिया हुआ’ दर्ज किया गया है। ऐसे कई अन्य आईडी भी मिले हैं जिनमें बच्चों को गोद लिया हुआ दिखाया गया है। जांचकर्ता इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि क्या बच्चों की पहचान में की गई यह हेराफेरी, गोद लेने की प्रक्रिया और कथित मतांतरण गतिविधियों के बीच आपस में कोई गहरा संबंध है या नहीं। बालक के बयान दर्ज होने के बाद इस मामले से जुड़े कई और अहम खुलासे होने की उम्मीद है।
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